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शहर में संक्रमण का खतरा, फैल सकती है महामारी

7 वर्ष पहले
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आदित्यपुर. एक ओर देश के प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान चलाकर देश को स्वच्छ बनाने की मुहिम चला रहे हैं, जिसका अनुशरण गांव गली से लेकर शहर में रहने वाले लोग कर भी रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आदित्यपुर नगर पर्षद क्षेत्र में पिछले डेढ़ महीने से कचरों का उठाव ही नहीं हो रहा है। आम लोग यत्र तत्र लगे कचरों के ढेर से परेशान हैं और कभी भी संक्रमण फैलने व गंभीर बीमारी की चपेट में आने से भयभीत हैं। कुछ पार्षदों द्वारा अपने स्तर से कचरे का उठाव कर जय प्रकाश उद्यान में नदी किनारे फेंका जा रहा है, जबकि यहां 25 दिसंबर से पिकनिक मनाने वाले सैलानियों की भीड़ लगने वाली है। ऐसे में नप क्षेत्र का कोई भी हिस्सा गंदगी से दूर नहीं रह पाएगा और संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाएगी।
^अभी हाल ही में बागबेड़ा के जटा झोपड़ी मुहल्ले में गंभीर बीमारी की चपेट में आकर दर्जनों लोग परेशानी झेल चुके हैं। कुछ लोगों की जान भी गई है। लगभग ऐसी ही स्थित आदित्यपुर में किसी भी दिन किसी भी मुहल्ले में होने वाली है। जगह-जगह कचरों का अंबार लग गया है। कचरों का उठाव नहीं हो रहा है। बताया जाता है कि नगर पर्षद ने अब तक कचरों के फेंकने के लिए कोई जगह ही तय नहीं की है। अब तक नदी किनारे रेलवे की जमीन पर कचरा फेंका जा रहा था, जिससे नदी प्रदूषित हो रही थी। पिछले दिनों रेलवे ने यहां कचरा फेंकने पर रोक लगा दी। स्थिति यह है कि शीघ्र कोई उपाय नहीं हुआ तो यहां के लोग भी संक्रमित बीमारी से मरने लगेंगे। इस मामले में जिला प्रशासन को हस्तक्षेप कर जल्द कोई ठोस उपाय करनी चाहिए। अधिवक्ता ओम प्रकाश, अध्यक्ष जन कल्याण मोर्चा आदित्यपुर।
क्या कहते हैं प्रबुद्धजन
नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी व वार्ड पार्षद साथ ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष केवल विकास कार्य से मिलने वाले कमीशन के चक्कर में लगे रहते हैं। इन्हें क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य व उनकी समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है। गली मुहल्लों से डेढ़ महीने से कचरा नहीं उठ रहा है इस पर किसी का ध्यान नहीं है। जब किसी मुहल्ले में लोग मरने लगेंगे तब इनकी कुंभकर्णी नींद टूटेगी। एक सप्ताह के अंदर अगर इसका निदान नहीं होता है तो हमलोग आम लोगों के साथ नगर पर्षद का घेराव करेंगे और नगर विकास विभाग समेत प्रधानमंत्री कार्यालय को भी इससे अवगत कराएंगे। भोगेन्द्र नाथ झा, भाजपा नेता आदित्यपुर।

अब तक रेलवे की जमीन पर नदी किनारे कचरों को फेंका जाता था। जहां छठ के समय से ही रेलवे ने कचरा फेंकने पर रोक लगा दी है। ऐसे में नगर पर्षद कार्यालय के समक्ष जमीन की समस्या हो गई है। आखिर कचरा कहां फेंका जाए। हमने कुछ दिन पूर्व ही अनुमंडलाधिकारी को पत्र लिखकर कचरा फेंकने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है, हम दोबारा रिमाइंडर देने जा रहे हैं। शीघ्र इसका समाधान होगा और शहर वासियों को कचरे से मुक्ति मिलेगी। सुरेश कुमार यादव, कार्यपालक पदाधिकारी, नप आदित्यपुर।