जमशेदपुर। मतदान केंद्र का निर्धारण व मतदाता सूची का प्रकाशन धालभूम के एसडीओ प्रेमरंजन करेंगे। वे मतदाता सूची का विखंडीकरण भी करेंगे। इस काम के लिए पहले यूनियन के पदाधिकारियों और कर्मचारियों की सहायता ली जाती थी। इस बार कर्मचारी चुनाव कार्य से अलग रहेंगे और यूनियन के पदाधिकारी केवल दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। नोडल पदाधिकारी के रूप में एडीसी सुनील कुमार रहेंगे।
एेतिहासिक परंपरा की शुरुआत : उपाध्याय
यूनियन चुनाव के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले एलडी-2 के कमेटी मेंबर धर्मेंद्र उपाध्याय ने चुनाव के लिए डीसी द्वारा उठाए गए कदम को एेतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा है कि डीसी ने सरकारी अधिकारियों की चुनाव कमेटी बनाकर इतिहास रच दिया है। यह कदम सराहनीय है। इससे निर्वाचन क्षेत्र बनाने और बिगाड़ने के नाम पर कमेटी मेंबरों को धमकाने का खेल बंद होगा।
पांच सहायक निर्वाची पदाधिकारी तैनात
निर्वाची पदाधिकारी सुनील कुमार को सहयोग करने के लिए पांच सहायक निर्वाची पदाधिकारियों को तैनात किया गया है। इनमें जमशेदपुर के सीओ मनोज कुमार, पोटका के सीओ संजय पांडे, धालभूम की कार्यपालक दंडाधिकारी यस्मिता सिंह, अनिता केरकेट्टा व ललिता बाखला शामिल रहेंगी। निर्वाचन की अधिसूचना, नामांकन की तिथि, नामांकन पत्रों की जांच, प्रत्याशियों की सूची, मतपत्रों का प्रकाशन, मतदान कराने और परिणाम की घोषणा की जिम्मेदारी एडीसी की है।
नामांकन पत्र प्रारूप का होगा प्रकाशन
नामांकन पत्र प्रारूप के प्रकाशन की जिम्मेवारी विधि शाखा के वरीय प्रभारी उप समाहर्ता अनिल कुमार राय को सौंपी गई है। नामांकन पत्र के प्रारूप के प्रकाशन के साथ उसकी जांच भी उप समाहर्ता ही करेंगे। प्रत्याशियों की जमानत राशि का फैसला भी अनिल कुमार राय को ही करना है।
प्रशासन की चुनाव कमेटी पर महामंत्री ने उठायी ऊंगली
टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव के लिए प्रशासन द्वारा बनायी गयी कमेटी पर महामंत्री बीके डिंडा ने ऊंगली उठायी है। उन्होंने कहा है कि कमेटी में केवल सरकारी कर्मचारियों को रखा गया है। कमेटी में यूनियन के किसी भी व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया है, तो निर्वाचन क्षेत्र कैसे बनेगा ? क्या सरकारी कर्मचारियों को विभागों का स्ट्रक्चर पता है कि वे निर्वाचन क्षेत्र बना लेंगे? आखिरकार किससे सलाह ली जाएगी? इससे सवाल खड़ा होता है कि आखिर चुनाव कितना साफ -सुथरा होगा?
यूनियन के बड़े नेताओं पर रहेगी प्रशासन की नजर
टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव विवाद रहित संपन्न करने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों पर बदलाव किया है। यूनियन के बड़े नेताओं पर नकेल कसने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए गए हैं। बड़े नेताओं की गतिविधियों पर प्रशासन की नजर रहेगी। प्रशासन उन स्थानों को चिह्नित कर रहा है, जहां से नेता चुनाव कार्य का संचालन करेंगे। चुनाव की पूरी प्रक्रिया से यूनियन के नेताओं और कर्मचारियों को अलग कर दिया गया है।
अधिकारियों के बीच काम का बंटवारा
डीसी डॉ अमिताभ कौशल ने चुनाव के लिए जिस तरह की व्यवस्था की है, उसमें किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की मनमानी नहीं चल पाएगी। काम का बंटवारा प्रशासनिक अधिकारियों के बीच किया गया है। पहली बार प्रशासनिक अधिकारियों को यूनियन चुनाव में पर्यवेक्षक बनाया गया, जो चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखेंगे और सीधे डीसी को रिपोर्ट करेंगे।
चुनाव आदर्श आचार संहिता के दायरे में क्या-क्या, टाटा स्टील प्रबंधन पर कई तरह की लगी बंदिश
चुनाव तिथि की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके तहत टाटा स्टील प्रबंधन पर कई तरह की बंदिश लग गई है।
{ कंपनी प्रबंधन चुनाव होने तक किसी कर्मचारी का तबादला
नहीं कर सकेगा। प्रबंधन न तो किसी कर्मचारी का प्रमोशन कर सकेगा और न ही दंडित कर सकेगा।
{ विशेष परिस्थिति में तबादला, प्रोन्नति या दंडित करना प्रबंधन के लिए जरूरी होगा,
तो निर्वाची पदाधिकारी एडीसी सुनील कुमार से इसकी अनुमति लेनी होगी।{ प्रबंधन की ओर से कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया जाएगा, जिससे चुनाव की स्वतंत्रता व निष्पक्षता प्रभावित हो।
गर प्रत्याशी चुनाव के दौरान किसी को धमकाते या प्रलोभन देते हैं, तो इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।
{ जाति, धर्म, प्रांत या भाषा के नाम पर वोट मांगना भी आचार संहिता का
उल्लंघन माना जाएगा।
{ प्रत्याशी अगर सार्वजनिक स्थान पर सभा का आयोजन करेंगे और कंपनी परिसर के अंदर रैली निकालेंगे, तो उन्हें पूर्व में निर्वाची पदाधिकारी से अनुमति लेनी होगी।
टीडब्ल्यूयू में चुनाव का नोटिस लगाडीसी डॉ अमिताभ कौशल के हस्ताक्षर वाली सात पृष्ठ की सूचना टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगाई गई है। इसमें पूरे चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी गई है। नोटिस पढ़ने के लिए यूनियन कार्यालय में कर्मचारियों की भीड़ लगी रही। शाम तक यूनियन में काेई चहल-पहल नहीं थी, लेकिन 7.30 बजे जैसे ही नोटिस बोर्ड पर चुनाव से संबंधित जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया कार्यक्रम लगाया गया, वहां चहल-पहल बढ़ गई। इसके बाद चुनाव कैसे होगा, इस पर कर्मचारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। कर्मचारियों के बीच चर्चा इस बात को लेकर है कि चुनाव ग्लोबल या निर्वाचन क्षेत्र बनाकर होगा। पिछला चुनाव ग्लोबल हुआ था, िजससे कई विभागों के कई सेक्शनों का प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था।
पुलिस बल की होगी तैनाती
टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये जाएंंगे। इस संबंध में डीसी डॉ अमिताभ कौशल ने एसएसपी को कार्रवाई का आदेश दिया है। दंडाधिकारी के साथ पुलिस के जवानों को तैनात किया जाएगा।
डिंडा को दी आदेश की प्रतिटाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव कार्यक्रम के संबंध में प्रशासन द्वारा जारी आदेश की प्रति महासचिव बीके डिंडा को बुला कर सौंपी गई। उपायुक्त कार्यालय में शाम करीब छह बजे विधि शाखा के वरीय प्रभारी पदाधिकारी अनिल कुमार राय ने डिंडा को अपने कक्ष में बुलाया और चुनाव से संबंधित आदेश की प्रति की रिसीव करा दी। साथ ही डिंडा से यूनियन के बिष्टुपुर स्थित कार्यालय का फैक्स नंबर लिया गया। प्रशासन ने फैक्स पर आदेश की प्रति यूनियन कार्यालय को भी भेज दी। यूनियन चुनाव को लेकर काफी विवाद होता रहा है, इसलिए प्रशासन काफी सतर्कता बरत रहा है।
निर्वाची पदाधिकारी करेंगे जांचआचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत आने पर निर्वाची पदाधिकारी मामले की जांच करेंगे। आरोप सही पाए जाने पर चुनावी प्रक्रिया चाहे किसी भी चरण में क्यों न हो, संबंधित लोगों का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।
प्राशासनिक टीम ही मांगेगी कंपनी से सूचना
डीसी द्वारा गठित पांच सदस्यीय टीम ही टाटा स्टील प्रबंधन से किसी भी तरह की जानकारी मांगेगी। चुनाव के लिए यूनियन या कंपनी प्रबंधन स्थान उपलब्ध कराएगा।
पांच सदस्यीय टीम में कौन-कौन
टीम में एडीसी सुनील कुमार, एसडीओ प्रेमरंजन, जिला आपूर्ति पदाधिकारी दिलीप तिवारी, आईटीडीए के प्रोजेक्ट ऑफिसर परमेश्वर भगत व श्रमायुक्त एसएस पाठक को शामिल किया है। इस कमेटी के सामने यूनियन प्रतिनिधि अपना विरोध दर्ज करा सकेंगे या किसी तरह का दावा कर सकेंगे। अगर सर्वसम्मति से कोई फैसला नहीं होगा, तो कमेटी बहुमत के आधार पर फैसला करेगी।
चुनाव का खर्च यूनियन ही वहन करेगी : चुनाव सामग्री मसलन बैलेट पेपर, बैलेट बॉक्स, स्टेशनरी, वाहन और चुनावी प्रक्रिया की रिकार्डिंग कराने के लिए वीडियो कैमरा यूनियन ही उपलब्ध कराएगी। चुनाव खर्च का वहन यूनियन को ही करना है। स्थापना उप समाहर्ता दिलीप कुमार तिवारी चुनावी खर्च का आकलन करेंगे। चुनाव कराने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के पारिश्रमिक का निर्धारण कर खर्च की वसूली भी यूनियन से ही की जाएगी। पूर्व में पारिश्रमिक मानदेय के तौर पर कर्मचारियों को दिया जाता था, पर इस बार सरकारी खजाने में जमा कर दिया जाएगा और कर्मचारियों को क्षतिपूर्ति अवकाश दिया जाएगा।
कमेटी मेंबरों को किसी के पीछे भागना नहीं पड़ेगा
निर्वाचन क्षेत्र बनाने के लिए कमेटी मेंबर हर ग्रुप में दौड़ा करते थे, अब उन्हें दौड़-भाग नहीं करनी पड़ेगी। डीसी पर पूरा भरोसा है। निर्वाचन क्षेत्र बना कर चुनाव होना चाहिए।'
संजीव कुमार चौधरी, डिप्टी प्रेसिडेंट
डीसी-एसएसपी पर पूरी अास्था
डीसी और एसएसपी पर पूरा अास्था है। एेसा लगता है कि अब निष्पक्ष चुनाव होगा।'
रघुनाथ पांडे, विपक्ष के नेता, टाटा वर्कर्स यूनियन में
कार्यक्रम अच्छा है
^चुनाव का कार्यक्रम बहुत अच्छा है। प्रशासन अच्छी तरह से ही चुनाव कराएगा। जितनी जल्दी चुनाव हो, उतना अच्छा है।' भगवान सिंह, एसएमडी के कमेटी मेंबर
प्रशासन का कदम सराहनीय
चुनाव के संबंध में उपायुक्त द्वारा उठाया गया कदम सराहनीय है। चुनाव बढ़िया से हो जाए, ऐसी कामना है। कोई और आगे केस मुकदमा करने के लिए न जाए, ऐसा लगता है।'
सतीश कुमार सिंह, यूनियन के सहायक सचिव
निर्वाचन क्षेत्र के आधार पर हो चुनाव : नीतेश राज
टाटा स्टील सीआरएम के कमेटी मेंबर नीतेश राज ने टाटा वर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) का चुनाव निर्वाचन क्षेत्र के आधार पर कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में कमेटी मेंबरों का एक प्रतिनिधिमंडल डीसी डॉ अमिताभ कौशल से समय लेकर मिलेगा।