जमशेदपुर। इग्नू (नई दिल्ली) के निदेशक डॉ. संजय कांत प्रसाद ने कहा कि आज हमारी जिंदगी में अधिकतर समस्याएं इसलिए है कि हम अपने आप को जानते नहीं हैं। हमारी पूरी जिंदगी दूसरों का जानने में खत्म हो जाती है। डॉ. प्रसाद शनिवार को सेंटर फॉर एक्सीलेंस में आयोजित शहर के पहले साइकोलॉजिकल और मोटिवेशनल सेंटर प्रदर्शिका के उदघाटन समारोह में बोल रहे थे।
डॉ. प्रसाद ने कहा कि आज की प्रतियोगी दुनिया में काउंसलिंग बेहद जरूरी हो गया है। काउंसलिंग का मकसद किसी व्यक्ति की क्षमता को उसकी अभिरूचि के अनुरूप बढ़ाना है ताकि वह अपने सपने को मूर्त रूप दे सके। उन्होंने स्कूली बच्चों के व्यवहार को जानने, समझने और उसे सही रूप देने पर जोर दिया। निदेशक ने बताया कि काउंसलिंग पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति है, जबकि गाइडेंस के लिए पेशेवर काउंसलर होना जरूरी नहीं है।
फैशन ओरिएंटेड प्लानिंग
हम अपनी जिंदगी की योजना फैशन ओरिएंटेड प्लानिंग के तहत बनाते हैं, जबकि वह एप्टीट्यूट (अभिरूचि) के अनुरूप होना चाहिए। हर उम्र के लोगों को काउंसलिंग की जरूरत है।
स्कूलों में काउंसलर जरूरी
हर स्कूल में काउंसलर की नियुक्ति होनी चाहिए। इग्नू की ओर से काउंसलिंग और गाइडेंस पर कोर्स कराया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया कि बच्चों में लर्निंग डिसेबिलिटी को कई बार स्कूल और पैरेंट्स बच्चों की कमजोरी समझ लेते हैं। ऐसे में जरूरी है कि स्कूल और पैरेंट्स को ऐसी समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाया जाए।
बच्चों से जुड़ें अभिभावक
डॉ.संजय कांत ने कहा कि आज पैरेंट्स बच्चों से दूर हो रहे हैं। आप जितने भी व्यस्त हों, बच्चों के लिए समय निकालना जरूरी है। ऐसे बच्चे जल्द गलत संगति में चले जाते हैं। इंटरनेट ने भी बच्चों को काफी डिस्ट्रैक्ट किया है।
काउंसलिंग आज की जरूरत : डीईओ
कार्यक्रम को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) मुकेश कुमार सिन्हा ने भी संबोधित किया। उन्होंने अपने बेटे की मिसाल देकर काउंसलिंग को आज की जरूरत बताया। स्वागत भाषण प्रदर्शिका की निदेशक डॉ. निधि श्रीवास्तव ने दिया। मौके पर डॉ. जूही समर्पिता समेत विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपल उपस्थित थे।