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डाउनलोड करेंजमशेदपुर. टाटा मोटर्स की कंपल्सरी सेपरेशन स्कीम (सीएसएस) स्वेच्छा से स्वीकार नहीं करने वाले सुपरवाइजरों-अधिकारियों के लिए बुरी खबर है। 31 जनवरी को स्कीम की मियाद पूरी होने के बाद नन परफॉर्मर अधिकारियों को बगैर स्कीम के लाभ के ही कंपनी से जाना होगा। कंपनी के सूत्रों के अनुसार जिन अधिकारियों को इस स्कीम के तहत बुलाया गया है, उनमें से 80 फीसदी का रिस्पांस ठीक रहा है।
शेष 20 फीसदी अधिकारी जो इस स्कीम के तहत नहीं आ रहे हैं, वे 31 के बाद हाई रिस्क जोन में चले जाएंगे। कंपनी ऐसे अधिकारियों को नियम के अनुसार दो से तीन माह में बाहर का रास्ता दिखा देगी। ऐसे में इन अधिकारियों को न तो स्कीम का लाभ मिलेगा और न कंपनी में रहने का मौका। कंपनी ने जनवरी के पहले सप्ताह में सीएसएस लागू किया था। टाटा मोटर्स समेत टीएमएल ड्राइवलाइन में करीब दो हजार सुपरवाइजर और अधिकारी हैं, जिसमें से 340 से ज्यादा अधिकारियों की छंटनी की जानी है।
दूसरे प्लांट में भी लागू
बाजार में आई मंदी से निबटने के लिए टाटा मोटर्स ने जमशेदपुर प्लांट समेत दूसरी इकाईयों में भी कंपलसरी सेपरेशन स्कीम लागू किया है। इस स्कीम में कंपनी अपने वैसे सुपरवाइजरों और अधिकारियों को शामिल कर रही है, जिनका परफॉर्मेंस उम्मीद के अनुरूप नहीं है। कंपनी प्रवक्ता कैप्टन पीजे सिंह पहले ही स्कीम लागू किए जाने की आधिकारिक पुष्टि कर चुके हैं। कंपनी ने अपने कंपल्सरी सेपरेशन स्कीम के लिए उम्र की कोई बंदिश नहीं रखी है। यह स्कीम टीएम ए, बी और सी के सुपरवाइजरों से लेकर टीएम वन से फाइव और ईजी ग्रुप के अधिकारियों तक के लिए लागू की गई है।
एसबी बोरवंकर पहुंचे शहर
जमशेदपुर त्न टाटा मोटर्स के कार्यकारी निदेशक (गुणवत्ता) एसबी बोरवंकर बुधवार को शहर पहुंचे। माना जा रहा है कि कंपनी के एमडी कार्ल स्लिम की मौत के बाद स्थानीय अधिकारियों से आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। अधिकारियों संग वे कंपल्सरी सेपरेशन स्कीम पर चर्चा कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि बोरवंकर भी बैंकाक में गत शुक्रवार को हुई बोर्ड मीटिंग में कार्ल स्लिम के साथ थे।
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