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फोन व इंटरनेट बने हथियार लोग हो रहे ठगी के शिकार

7 वर्ष पहले
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जमशेदपुर. बदलते समय के साथ ही बदमाशों ने भी लोगों को शिकार बनाने का तरीका बदल लिया है। पहले बदमाश लोगों को लूटने के लिए पिस्तौल, चाकू या किसी अन्य हथियार का इस्तेमाल करते थे, परंतु आज वे फोन और इंटरनेट के जरिए ही अपना काम निकाल रहे हैं।
साइबर क्राइम करने वाले गिरोह के सदस्य सुनियोजित तरीके से लोगों को अपनी जाल में फांस कर इस तरह ठगी करते हैं कि उन्हें तत्काल पता नहीं चलता। जब तक उन्हें ठगी का एहसास होता है, काफी देर हो चुकी होती है। गिरोह के सदस्य अलग-अलग तरीके से लोगों को ठग रहे हैं, जैसे-फोन पर बैंक अधिकारी बनकर, इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बनकर, जाली चेक के माध्यम से, एटीएम में छेड़छाड़ कर इत्यादि। ऐसे ज्यादातर मामलों में पुलिस की कार्रवाई प्राथमिकी तक ही सीमित होकर रह गई है।
पुलिस भी नहीं करती मदद
एक-दो मामलों को छोड़ दें, तो पुलिस भी इस तरह के गिरोह को पकड़ने में अब तक नाकाम रही है। गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए दिलचस्पी दिखाने की बात तो दूर, पुलिस शिकायत दर्ज करने से भी परहेज करती है। फोन पर एटीएम का पिन पूछकर ठगी करने वाले एक गिरोह के संबंध में दैनिक भास्कर के एक कर्मचारी ने पुलिस को जानकारी देने की कोशिश की, तो उन्हें भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर संपर्क करने की बात कहकर पुलिस बचती रही।
जाली चेक से खाता से निकासी
ठग गिरोह के सदस्य जाली चेक के माध्यम से बैंक खाता से रुपए की निकासी कर लेते हैं। नवंबर-2014 में जाली चेक के माध्यम से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की गोलमुरी, साकची व बाराद्वारी शाखा से गिरोह के सदस्यों ने करीब 28 लाख रुपए की निकासी की है। इस मामले में साकची, सीतारामडेरा और गोलमुरी थाना में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। गोलमुरी पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया। लेकिन गिरोह का सरगना अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है।
नौकरी का झांसा देकर छात्र से ठगी
सिदगोड़ा थाना अंतर्गत ट्यूब कॉलोनी निवासी सह एबीएम कॉलेज के छात्र चंचल वैभव से पर्थ (आस्ट्रेलिया) में नौकरी दिलाने के नाम पर 2.11 लाख रुपए की ठगी की गई। चंचल ने इस संबंध में इंटरनेट पर जॉब फेडरेशन पर विज्ञापन देखा था। इस संबंध में चंचल ने सिदगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। लेकिन, अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
बैंक अधिकारी बन की ठगी
इस तरह ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। फोन पर बताया जाता है कि बैंक द्वारा एटीएम का पिन नंबर बदला जा रहा है और नया पिन नंबर दिया जाएगा। इसी बहाने लोगों से एटीएम व खाता का डिटेल पूछकर रुपए की निकासी कर ली जाती है। इस संबंध में शहर के कई थानों में प्राथमिकी दर्ज है। लेकिन, पुलिस अबतक किसी मामले में खुलासा नहीं कर सकी है।
इंश्योरेंस अधिकारी बन 16 लाख ठगे
ठग गिरोह के सदस्य ने इंश्योरेंस अधिकारी बनकर कदमा थाना अंतर्गत विजया हेरिटेज निवासी एक चिकित्सक से 16 लाख रुपए ले लिए। पुलिस ने इस मामले में नई दिल्ली से जावेद मल्लिक नामक युवक को गिरफ्तार किया। लेकिन गिरोह के अन्य सदस्य व सरगना की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
बचाव के उपाय
अपने बैंक के कागजात समेत अन्य महत्वपूर्ण कागजात को घर या ऑफिस में खुले स्थान पर न रखें।
फोन पर किसी को अपने बैंक खाता या एटीएम पिन की जानकारी न दें।
फोन करने वाले या फिर खुद को अधिकारी बताने वाले व्यक्ति के संबंध में पूरी जानकारी इकट्‌ठा करने के बाद ही उसे किसी चीज की जानकारी दें।
किसी कंपनी की पूर्ण जानकारी इकट्‌ठा करने के बाद ही आगे की कार्रवाई करें।
सजा : तीन वर्ष सश्रम कारावास
साइबर क्राइम के मामले में पकड़े जाने पर आरोपी को अधिकतम तीन वर्ष की सश्रम कारावास की सजा हो सकती है। इसके अलावा आर्थिक दंड का भी प्रावधान है।
बढ़ी है साइबर क्राइम की संख्या लोगों का जागरूक होना जरूरी
साइबर क्राइम की संख्या बढ़ी है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है। गिरोह के कई लोगों को पकड़ा गया है। इसके अलावा अन्य की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस की ओर से जागरूकता अभियान चलाया गया था।' कार्तिक एस, सिटी एसपी