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बलियापुरको शहर का

7 वर्ष पहले
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बलियापुर एक ग्रामीण क्षेत्र है। इसे प्रखंड का दर्जा प्राप्त है। प्रखंड होने के कारण बलियापुर और यहां के बाजार आस पास के क्षत्रों के लिए काफी महत्व रखते हैं। प्रखंड में ऐसा और बाजार नहीं है। दर्जनों पंचायत के ग्रामीण काम-काज कई अन्य जरूरतों के लिए बलियापुर बाजार आते हैं। सप्ताह के मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को यहां हटिया लगती है। यहां सब्जी सहित अन्य कृषि संबंधी व्यवसाय होते हैं। बकरा, भेड़ा, पोल्ट्री उत्पाद आदि की भी खरीद-बिक्री होती है।


बलियापुरको शहर का दर्जा दिया जाना है। इसको लेकर नगर विकास सचिव ने उपायुक्त धनबाद से प्रस्ताव मांगा है। शहर का दर्जा मिले, इसके लिए कई अर्हताएं पूरी करनी होगी। लेकिन इसे विडंबना कहें या प्रशासनिक लापरवाही कि बलियापुर में एक अदना सा ऑटाे, ट्रेकर, बस आदि का स्टैंड तक नहीं है। इसका असर खासकर के साप्ताहिक बाजार के दिन पड़ता है। आमजन इस कुव्यवस्था को देख जिला प्रशासन को खूब काेसते हैं। कारण, ऑटो-ट्रेकर चालक व्यवसायियों की दुकानों के सामने ही वाहन को खड़ा कर देते हैं। व्यवसायी चाहकर भी विरोध नहीं करते हैं। विरोध करने पर मामला कभी कभार हिंसक भी हो जाता है।

...और सीओ की पहल | पुराना रिकार्ड देखने के बाद करेगी

आवेदन | नजर अंदाज

अलग | अतिक्रमण का खेल

असर | व्यवसाय पर पड़ता है

दोनों किनारे वाहन खड़ा रहने से सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है। राहगीरों अौर दुपहिया वाहन चालकों को दुर्घटना का भय बना रहता है। जाम की ऐसी ही स्थिति में संगियाटांड़ गांव के एक युवक साइकिल से गिरकर ट्रक के नीचे गया और उसकी दर्दनाक मौत हो गई। दोपहिया वाहन चालक दुकान तक नहीं पहुंच पाते। जहां तहां वाहन खड़ा करने से वाहन चोरी का भय बना रहता है।

दुर्घटना में हो चुकी है मौत

प्रखंड का दर्जा प्राप्त है बलियापुर को

{ऑटो-ट्रेकर चालक दुकानों के सामने ही कर देते हैं वाहन खड़ा

{ बलियापुर साप्ताहिक बाजार के दिन देखते ही बनता है नजारा

स्टैंड तो है नहीं, दिलाने चले शहर का दर्जा

{व्यवसायी चाहकर भी नहीं करते विरोध