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डुमरी में त्रिकोणीय संघर्ष के बन रहे आसार
डुमरीविधानसभा क्षेत्र में चुनाव की घडिय़ां नजदीक गई हैं। चुनाव प्रचार खत्म हो गया है। अब प्रत्याशी डोर टू डोर जाकर अपनी-अपनी गोटी सेट करने में लग गए हैं। आज की रात प्रत्याशियों के लिए कयामत की रात है। जो भी प्रत्याशी रेस में हैं वे रातो को बिस्तर पर सोने में नहीं, बल्कि जागकर और चौकस रहकर अपने पक्ष में लोगों को करने में तथा जो लोग अपने पक्ष में हो गए हैं, उन्हें बचाकर रखने में ही पूरी रात गुजारने वाले हैं। डुमरी विधानसभा का लगभग 40 फीसदी हिस्सा उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है इसलिए प्रशासन के सामने भी चुनाव कराना कड़ी चुनौती है। क्षेत्र में बुलेट बैलेट के बीच प्रतिस्पर्धा रहेगी।
मुद्दे जो हावी हैं
यहांरोजगार का साधन नहीं रहने के कारण 20 हजार से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। उच्च शिक्षा का बेहतर साधन नहीं रहने के कारण बच्चों को दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। बेहतर स्वास्थ्य सेवा नहीं मिलने के कारण हर वर्ष दर्जनों लोगों की जान जाती है। साथ ही क्षेत्र में गरीबी बेरोजगारी के कारण उग्रवाद पनपा हुआ है।
ये बिगाड़ेंगे खेल
सपाप्रत्याशी बाबूलाल रविदास झामुमो का खेल तथा झाविमो प्रत्याशी प्रदीप साहू भाजपा का खेल बिगाड़ सकते हैं। क्योंकि रविदास समाज का ज्यादातर वोट झामुमो को जाता था, वहीं गुप्ता समाज का ज्यादातर वोट भाजपा को जाता था।
भाजपा-झामुमो जदयू के बीच टक्कर
अबतक बहे बयार के अनुसार डुमरी में भाजपा प्रत्याशी लालचंद महतो, झामुमो प्रत्याशी जगरनाथ महतो तथा जदयू प्रत्याशी मौलाना मोबिन रिजवी के बीच त्रिकोणीय टक्कर की बात कही जा रही है। इसमें लालचंद को आजसू का समर्थन प्राप्त है। आजसू के दामोदर महतो को पिछले चुनाव में 20,292 मत मिले थे जबकि लालचंद महतो को 19,084 मत। वहीं मोदी लहर, बदलाव लहर तथा जगरनाथ की दबंगता के विरोध में आक्रोश का लाभ उन्हें मिल सकता है। वहीं झामुमो प्रत्याशी जगरनाथ महतो द्वारा अपने 10 वर्षों के कार्यकाल में नावाडीह क्षेत्र के सड़क, पुल पुलिया, शिक्षा आदि क्षेत्रों में किए गए विकास तथा उनके सहज उपलब्धता का लाभ उन्हें मिल सकता है। वहीं युवा कार्यकर्ताओं की आक्रामकता अपने नेता के प्रति समर्पण का लाभ भी उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। जदयू के मौलाना मोबिन रिजवी को राजद तथा कांग्रेस का भी समर्थन प्राप्त है। साथ ही पूर्व के जदयू नेता लालचंद महतो के साथ रहक