हिंदी की उपेक्षा ठीक नहीं : विनय
बेरमो. हिंदीभारतमाता के माथे की बिंदी है। लेकिन स्वतंत्र भारत में इस अनमोल बिंदी का तेज अंग्रेजियत की चकाचौंध में खो गया है। राष्ट्रभाषा राष्ट्र की वाणी है जिसकी उपेक्षा कर कोई देश गौरवान्वित नहीं हो सकता। उक्त बातें भजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य विनय कुमार सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि हिंदी में वाचन, लेखन, भाषण पठन-पाठन हमारे लिए गौरव का विषय होना चाहिए। इसी से राष्ट्र की पहचान बनती है। लेकिन इस आत्महीनता की पराकाष्ठा ही कहें कि राष्ट्रभाषा में बात व्यवहार को ग्लानि तिरस्कार की दृष्टि से देखा जाता है। वोट मांगने वाले जब लोकतंत्र के मंदिर संसद में पहुंचकर अंग्रेजी में संभाषण करते हैं तो हमारा सिर शर्म से झुक जाता है।