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लड़कियों में आत्मबल का गुर सिखा रहे हैं नरेंद्र

6 वर्ष पहले
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कराटे सीखतीं राशि, मुस्कान और गुण।

प्रशिक्षक नरेंद्र सिन्हा।

मुकेश सिंह चौहान | रामगढ़

रीवरसाईड भुरकुंडा निवासी 47 वर्षीय नरेंद्र कुमार सिन्हा पिछले 35 वर्षों से कोयलांचल में कराटे का अलख जगा रहे हैं। खासकर लड़कियों में कराटे के माध्यम से आत्मबल की शक्ति भरने का काम पुरजोर कर रहे हैं। जिला के विभिन्न कोयलांचल में दो हजार से भी अधिक लड़कियों को कराटे का प्रशिक्षण दे रहे हैं। रामगढ़ स्पोर्ट्स कराटे एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र शोतोकान कराटे डू फेडरेशन के राज्यस्तरीय उप प्रशिक्षक भी हैं। ब्लैक बेल्ट छह डान की उपाधि प्राप्त की है। 1993 में कराटे नेशनल चैंपियनशिप और 1995 में साउथ एशिया में कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर चुके हैं।

लड़नेका मिलता है हौसला

नरेंद्रकहते हैं कि 1980 से मार्शल आर्ट के प्रति रुझान हुआ अौर कराटे के क्षेत्र में खुद को समर्पित कर दिया। लगातार नारी शोषण की खबरें देख और सुनकर दुखी होता था। उसी वक्त यह निर्णय लिया की नारियों में आत्मबल की शक्ति भरनी है। अगर लड़कियां कराटे में दक्ष हो जाएं, तो किसी भी मुसीबत से लड़ सकती हैं। अगर इनमें आत्मबल जाग गया तो दुनिया के किसी भी मुसीबत से लड़ सकती हैं। यही सोचकर अपने स्तर से लड़कियों को प्रशिक्षित करने लगा। लड़के भी खासे संख्या में कराटे सीखते हैं।

कराटेमें योगा और कसरत साथ-साथ

नरेंद्रकहते हैं कि कराटे ऐसी कला है जिसे सीखने से सिर्फ लड़ने की ही शिक्षा नहीं मिलती, बल्कि शरीर और मस्तिष्क दोनों मजबूत होता है। यह एक ऐसी कला है जिसे आप सीखते हैं तो योगा और कसरत साथ-साथ हो जाता है। धीरे-धीरे इस कला के प्रति आज की पीढ़ी का रुझान बढ़ रहा है।

अंदरसे मिल रही है मजबूती

कराटेसिख रही राशि सिन्हा, मुस्कान कुमारी और गुण कुमारी कहती हैं कि जब से नरेंद्र सर से कराटे सिख रही हूं, अंदर से मजबूती मिल रही है। ऐसा लगता है कि जैसे डर भाग रहा हो। शुरु में कठिनाई होती थी, लेकिन अब प्रशिक्षण के बाद शरीर हल्का लगता है और पढ़ाई में भी मन लगता है।