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पॉलिथीन से बनी झोपड़ी में दिन गुजार रही है दलित िवधवा देवंती
रैली,जुलूस, राजनीतिक दाव पेंच या फिर वर्चस्व की लड़ाई! हर जगह दलित एक ढाल की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं। फिर समय निकल जाने के बाद उसका कोई महत्व नहींं रह जाता। दलित समाज किस हाल में है, इसे देखने वाला कोई नही है। ऐसा ही एक नजारा इन दिनों बिरनी प्रखण्ड के तुलाडीह गांव में देखा जा रहा है। राजनीतिक चक्रव्यूह में फंसा इस गांव के दलितों को कुछ राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए गुमराह कर अपनी ढाल के रूप में उपयोग कर रहे है।
आलम यह है कि हरिजन समुदाय एक दूसरे के दबाव में कर थाने में हरिजन उत्पीडऩ का मामला दर्ज करा रहे हैं। लेकिन इसी गांव की एक दलित गरीब विधवा महिला वर्षों से छोटी सी झोपड़ी में रहकर गुजारा कर रही है। गरीबी से तंग आकर दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीविकोपार्जन कर रही इस महिला के पास को सुविधा नहीं है। इस गरीब विधवा की मदद के लिए यहां के जनप्रतिनिधियों का हाथ आगे नहीं बढ़ पाया है। आलम यह है कि मकान के अभाव में विधवा झोपड़ी में रहकर अपने दो छोटे बच्चे का लालन पालन कर रही है। देखना है अफसरान और जनप्रतिनिधियों का ध्यान कब उस पर जाता है।
इंदिरा आवास भी नहीं
देवंतीएक इंदिरा आवास के लिए राजनेताओं से लेकर पंचायत के मुखिया, पंसस, प्रमुख के पास भी अपनी फरियाद कर चुकी है। लेकिन किसी का हृदय नहीं पसीजा। थक हार कर अपनी झोपड़ी को ही महल समझ कर गुजारा कर रही है।
सात साल पूर्व हो चुका है पति का िनधन
बिरनीप्रखण्ड के तुलाडीह गांव की दलित विधवा महिला देवंती देवी एक छोटी सी झोपडी में रहने को विवश है। सात वर्ष पूर्व उसके पति लक्ष्मण दास का निधन संक्रमित रोग से हो गया था। गरीबी और आर्थिक तंगी के कारण देवंती देवी अपने दो छोटे बच्चे का लालन पालन के लिए गांव, मुहल्लाें में दिहाडी मजदूरी करने लगी। इधर कुछ माह बाद बरसात के कारण जर्जर कच्चा मकान भी टूटकर धाराशायी हो गया। तब से लेकर आज तक एक झोपड़ी के सहारे अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर है।
अपनी झोपड़ी में दलित विधवा।
क्या कहते हैं अफसर
मोसमातदेवंती देवी का नाम बीपीएल सूची में नहीं रहने के कारण इंदिरा आवास का लाभ नहीं मिल पा रहा है। रही बात आर्थिक मदद की तो इस मामले में पहल की जाएगी।\\\"\\\" विजयकुमार, बीडीओ,बिरनी