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वोटर पटाओ अभियान में आई गति

7 वर्ष पहले
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हमतो चले थे सियासत की खेल खेलने जाने कब सुबह हुई और कब शाम बीत गई। जिसके दर पे खड़ा हुए वहीं पर हमें पैगाम भेज दी। जी हां कुछ इस कदर बगोदर में चुनावी नजारा देखने को मिल रही है। सियासत के इस दाव पेंच में वोटर पटाओ अभियान तेज हो गई है। हर प्रत्याशी अपने पक्ष में वोटरों को करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहें है। लेकिन यहां के वोटर आज तक अपनी जुबान खोलने का नाम नहीं ले रहें है। एक ओर जहां नेता जी के नींद उड़े हुए है तो वहीं दरबारियों के भी नींद हराम हो रहें है। क्या रात और क्या दिन नेताओं के लिए सब बराबर लग रहें है। हैरत की बात यह है कि हर प्रत्याशी आज के दौर में जनता के सबसे बड़े हितैषी साबित करने के लिए जी जान लगा दिया है। लेकिन जनता सब कुछ जान कर अपने प्रत्याशी को अंदर ही अंदर परख रही है। भला परखे क्यों नहीं ये पब्लिक है सब जानती है अंदर क्या है बाहर क्या सब पहचानती है।

नारे हुए किनारे, संगीत बना सहारा

बगोदरविस में प्रचार अभियान का नजारा ही कुछ अलग है। यहां पर प्रचार के लिए नारा जुलूस के बजाय संगीत सहारा बन गया है। खास कर संगीत क्षेत्रीय भाषा का हो गया है। संगीत के माध्यम से नेताजी को वोट डालने के लिए वोटरों से अपील किया जा रहा है। बगोदर में एक नेता जी ने प्रचार के लिए देश भक्ति पर आधारित संगीत तैयार किया है।

बगोदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे कुल 14 प्रत्याशी की चाल और ढाल देखते ही बनती है। इन सबके बीच नेताजी के मैनेजमेंट देखते ही बन रहा है। वोटर पटा अभियान में नेताजी को बाथरूम जाने तक का समय नहीं मिल पा रहा है। भला करें भी तो क्या करें कार्यकर्ता सर पर चढ़ कर नेताजी को कह रहें है नेताजी जल्दी चलिए फलनवा गांव में बुलाया जा रहा है।

नेता जी के चाल और ढाल

नेता जी के घर पर अनुष्ठान

चुनावप्रचार ओर तैयारी में लगे कार्यकर्ता इन दिनों अपने अपने घर को छोड़ कर नेताजी के घर में ही डेरा जमा लिया है। इन स्थितियों में भला नेताजी करें क्या करें बाध्य होकर अपने घर पर ही लंगर चढ़ाना पड़ रहा है। कई तरह के पकवान रोज बनाए जा रहें है। पकवानw की तैयारी करना और कार्यकर्ताओं की आवभगत के लिए नेताजी को अपने दूर दराज के रिश्तेदारों को भी बुलाना पड़ गया है। ताकि कार्यकर्ता नाराज नहीं हो जाए। देखना अब यह है कि क्या ऐसे कार्यकर्ता नेताजी को वैतरणी पार कराते है या नहीं।