- Hindi News
- जहां के कर्मचारी हों भूखे कैसे चलेगा यक्ष्मा उन्मूलन
जहां के कर्मचारी हों भूखे कैसे चलेगा यक्ष्मा उन्मूलन
जिलायक्ष्मा नियंत्रण केंद्र में कार्यरत अनुबंधकर्मियों काे साल भर से मानदेय भुगतान नहींं किए जाने से यक्ष्मा रोगियों के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे अति महत्वकांक्षी कार्यक्रम पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। सदर अस्पताल परिसर स्थित जिला यक्ष्मा केंद्र चाईबासा में पुनरीक्षित राष्ट्रीय यक्ष्मा नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कार्यरत अनुबंधकर्मियों को पिछले एक साल से मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण कर्मचारियों उनके आश्रितों के समक्ष पारिवारिक संकट गहराने लगा है।
इतना ही नहीं फील्ड में कार्यरत अनुबंधकर्मियों को पिछले 18 माह से क्षेत्र भ्रमण के लिए ईंधन का पैसा तक भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण क्षेत्र का भ्रमण कार्यक्रम पूरी तरह प्रभावित है। जिसका बुरा असर जिले के टीबी मरीजों पर पड़ रहा है। आरएनटीसीपी अनुबंधकर्मियों का पिछले एक साल से मानदेय का भुगतान नहीं किए जाने से बच्चों की पढ़ाई -लिखाई ओढ़ावा पहनावा से लेकर दो वक्त की रोटी जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है। दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है। नतीजतन अनुबंध कर्मी किसी तरह कर्जा लेकर परिवार का पालन पोषण करने को मजबूर हैं।
मानदेय भुगतान की मांग को लेकर अनुबंधकर्मियों ने पिछले 4 दिसंबर 14 को राज्य यक्ष्मा अनुबंधित कर्मचारी संघ के बैनर तले राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी से भेंट कर मांग पत्र भी सौंपा था।
मांग पत्र में क्या थी मांग
झारखंडराज्य के समस्त जिले में कार्यरत आरएनटीसीपी कर्मचारियों का वेतन का भुगतान 1 जनवरी 14 से लंबित है। जिस कारण कर्मचारियों एवं आश्रितों पर काफी मुश्किल पड़ी है। एवं आर्थिक एवं पारिवारिक स्थिति दयनीय हो गई है। बार बार आश्वासन के बाद भी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। संघ ने यथाशीघ्र मानदेय भुगतान की मांग करते हुए 23 दिसंबर तक उनकी मांगों को नहीं माने जाने पर 24 दिसंबर से राज्य भर में कार्य बहिष्कार का आंदोलन चलाने की चेतावनी दी है।
क्या कहते हैं यक्ष्मा केंद्र के कर्मचारी
अपनीजेब से पैसा खर्च कर भ्रमण टीम बाइकों पर पेट्रोल भर कर लोगों के बीच जागरूकता अभियान और यक्ष्मा के मरीजों को सेवा प्रदान कर रहे हैं। जिले के अनुबंधकर्मी एक ओर जहां सेवा की भावना से यक्ष्मा नियंत्रण अभियान में लगे हैं वहीं राज्य के अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में लापरवाही बरत रहे हैं। अपनी