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कोल्हान कमिश्नर आईजी करेंगे जांच

7 वर्ष पहले
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चाईबासाजेल की घटना को गृह विभाग ने काफी गंभीरता से लिया है। गौरतलब है कि मंगलवार को यहां से 15 कैदी फरार हो गए थे। वहीं इस दौरान हुई फायरिंग में दो कैदी मारे गए और तीन गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

गृह विभाग ने इस मामले की जांच की जिम्मेदारी कोल्हान के कमिश्नर एवं दक्षिण छोटानागपुर के आईजी को संयुक्त रूप से सौंपी है। इनसे सात बिंदुओं पर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।

> क्या नक्सली पृष्ठभूमि के सभी विचाराधीन कैदियों की पेशी एक ही तिथि को किया जाना प्रशासनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित है। कोर्ट के सामने अलग-अलग तिथियों में पेशी का अनुरोध किया गया है या नहीं।

> क्या बाहरी गेट को बंद किए बिना विचाराधीन बंदियों को कैदी वाहन से उतारा गया? यदि हां तो इसके लिए कौन दोषी है?

> क्या वह घटना स्वयं घटी यहा इसके पीछे कोई सोची समझी रणनीति अथवा साजिश थी?

> कैदी वाहन पर चार पुलिसकर्मियों के अलावा आगे-पीछे के स्कॉट वाहन में भी पुलिस थी। इन्होंने घटना को रोकने के लिए किस तरह का प्रयास किया गया। गोली किसने चलाई, गेट पर तैनात पुलिस बल या सुरक्षा में प्रतिनियुक्त बल?

> चाईबासा जेल के कैदियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी क्यों नहीं हो रही है। इसके लिए कौन दोषी है?

ये हैं जांच के बिंदु

यह था मामला

नौदिसंबर 2014 को शाम 4.20 जब कोर्ट से पेशी के बाद कैदियों को लेकर कैदी वाहन चाईबासा जेल गेट पर पहुंची तो कुछ कैदियों ने प्रतिनियुक्त सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया और भागने की कोशिश हुई। इसी क्रम में सुरक्षा बल को गाली चलानी पड़ी जिसमें दो विचाराधीन कैदियों की मौत हो गई और तीन घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ये सभी पांचों कैदी नक्सल कांडों में अभियुक्त रहे हैं। इनके अलावा 15 विचाराधीन कैदी भागने में सफल हो गए। जिनमें सात कैदी नक्सली कांडों में अभियुक्त हैं।