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8 हजार मजदूर बेकार

7 वर्ष पहले
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लीजनवीकरण नहीं होने से एसीसी की रजंका माइंस बंद हो गया है। एसीसी प्रबंधन ने वहां से अपने सभी उपकरण भी हटा लिए हैं। माइंस के बंद होने के कारण कंपनी के 8 हजार मजदूर भूखमरी के कगार पर गए हैं। इन मजदूरों ने अंतिम दम तक माइंस खुलवाने की शपथ ली है। वहीं 20 हजार लोग अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। माइंस के बंद होने से नाराज मजदूरों ने गुरुवार को झींकपानी कंपनी गेट के समक्ष सभा भी की।

एसीसी रजंका चूना पत्थर खदान चाईबासा सीमेंट कारखाना बचाओ अभियान समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सभा में मजदूरों ने कहा कि सरकार के उदासीन रवैये के कारण आज वे बेरोजगारी भूखमरी के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से अविलंब कंपनी का लीज नवीकरण करने की मांग की। यूनियन महासचिव अरविंद सिंह ने कहा कि यह समय सभी मजदूरों को आपसी गुटबाजी से उपर उठकर उद्याेग को बचाने के लिए सरकार पर दवाब बनाने का है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों की तरह सरकार को एक्सप्रेस ऑर्डर के तहत माइंस खुलवाने के लिए आदेश देना चाहिए।

समिति के महासचिव अरविंद कुमार सिंह सभा को संबोधित करते हुए।

सभा में मुख्य रूप से पप्पू महतो, राजू, श्री हांसदा, कौशल सिन्हा, शशि भूषण हेस्सा, प्रताप सिन्हा, त्रिभुवन प्रसाद, केएस गांधी, राजेश विश्वकर्मा, राकेश पांडेय आदि मौजूद थे।

संघर्ष का आह्वान

समितिके अध्यक्ष त्रिभुवन हेस्सा ने कहा कि जब तक सरकार खदान को फिर से चालू नहीं करा देती है, तब तक हमें एक साथ मिलकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि विगत 14 साल से राज्य सरकार के उदासीन रवैये के चलते यहां के करीब 8000 मजदूर प्रत्यक्ष 20 हजार लोग अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

शिक्षास्वास्थ्य पर पड़ेगा असर

हेस्साने कहा कि माइंस बंद हो जाने से कंपनी द्वारा संचालित स्कूल में पढ़ने वाले स्थानीय छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। वहीं चिकित्सा सुविधा भी नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि अभी पूरे देश के लोग दुर्गा- पूजा मनाने वाले हैं, परंतु क्षेत्र के लोग दुख भय की जिंदगी जीने को विवश हो जाएंगे। लिहाजा सरकार को माइंस जल्द खुलवाने के लिए आदेश जारी करना चाहिए।

ये थे मौजूद

सभा में उपस्थित एसीसी कंपनी के मजदूर।