राशि निकाली पूरी, पर सड़क रह गई अधूरी
विधानसभाकी प्राक्कलन समिति की चार सदस्यीय टीम ने सोमवार को परिसदन में योजनाओं की प्राक्कलन राशि किए गए कार्यों का जायजा लिया। समिति के अध्यक्ष सरफराज अहमद उपसचिव सिराज वजी ने बैठक में सभी विभागों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में प्राक्कलन की राशि, किए गए काम की वर्तमान स्थिति खर्च की राशि की विभागवार समीक्षा की। समीक्षा के बाद यह बात सामने आई कि कई योजनाओं के लिए राशि तो खर्च कर दी गई पर धरातल पर योजना का पता नहीं है। पूछताछ के दौरान कई कार्यों में गलतियां पाई गईं। इस अवसर पर सबसे अधिक गड़बड़ी पथ निर्माण विभाग के कार्यों में पाई गई। चाईबासा सैतवा सड़क के निर्माण कार्य पर समिति द्वारा खेद प्रकट किया गया।
बीचमें काम रोका
सैतवासे चाईबासा तक सड़क के लिए जुलाई 2010 में इकरारनामा किया गया था। इसकी राशि 1673.12 लाख प्राक्कलित की गई थी। इसमें से संवेदक के द्वारा 30. 92 लाख की राशि की निकासी कर सड़क निर्माण का कुछ काम किया गया जिसे अब बंद कर दिया गया है। इस संदर्भ में पथ निर्माण विभाग द्वारा 2 करोड़ 43 लाख 35 हजार 506 रुपए की वसूली के लिए नीलामवाद दाखिल किया गया है। वहीं हाटगम्हरिया से बलंडिया,मझगांव से बेनीसागर सड़क की भी यही स्थिति है। इस सड़क के लिए 2008 में एग्रीमेंट किया गया। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए मार्च 2010 तक का समय दिया गया था। इस योजना के लिए प्राक्कलित राशि 4677.2 लाख थी जिसमें से 302 लाख की निकासी कर खर्च किया गया। जिसके बाद काम को बंद कर दिया गया है। कमिटी ने जांच की रिपोर्ट विधान सभा को सौंपने के बाद उसपर अगली कार्रवाई होने की बात कही। इस अवसर पर उपविकास आयुक्त, डीएफओ, पथ निर्माण विभाग, खनन विभाग, वाणिज्यकर विभाग, परिवहन विभाग, विद्युत विभाग, शिक्षा विभाग आदि के वरीय पदाधिकारी मौजूद थे। प्राक्कलन समिति में गीता कोड़ा, जगन्नाथ महतो, विदेश सिंह शामिल थे।