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कई लोगों पर पड़ेगी जांच की आंच

7 वर्ष पहले
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डीआरडीएके लेखा सहायक राजीव कुमार सिन्हा की मौत मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस इस कांड से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है। कहा जा रहा है कि जैसे- जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इसकी आंच विभाग के भी कुछ लोगों पर पड़ेगी। कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे कई दावों के कारण पुलिस को भी अब दाल में कुछ काला नजर आने लगा है। वहीं, राजीव की प|ी ने इंदिरा आवास योजना को लेकर प्रताड़ित किए जाने की बात कहकर पुलिसिया जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है।

लिहाजा, मामले की जांच कर रही सदर थाना पुलिस भी अब फूंक- फूंक कर चल रही है। पुलिस केवल मामले की तह तक जाना चाहती है, बल्कि सारी सच्चाई का पता भी लगाना चाहती है। हालांकि मामले की जांच कर रहे केस के अनुसंधानकर्ता अतीकुर्रहमान खान ने इस मामले में अभी कुछ भी कहने से इंकार किया है, लेकिन उन्होंने जांच लंबी चलने के संकेत दिए हैं। चूंकि राजीव डीआरडीए में लेखा सहायक थे और इंदिरा आवास के मामलों को देखते थे।

ऐसे में पुलिस को इन योजनाओं की फाइलें भी खंगालनी पड़ सकती है। यदि इसमें गड़बड़ी मिली तो अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी उंगली उठ सकती है और भी डीआरडीए की परेशानी बढ़ सकती है। फिलहाल यह मामला डीआरडीए में ही तूल पकड़ने लगा है और विभाग के अधिकतर कर्मचारी मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं। कर्मचारियों ने डीसी से मिलकर मामले में अपने बयान को कलमबंद कराने की पेशकश भी की है।

मामले की जांच इसलिए भी ज्यादा जरूरी हो गई है कि है, क्योंकि पुलिस को घटना स्थल से सुसाइडल नोट नहीं मिल सका है। डीआरडीए के ही कई कर्मी सुसाइड नोट होने का दावा कर रहे हैं। यह दावा उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में किया गया है। ज्ञापन की यह कॉपी कोल्हान के प्रमंडलीय आयुक्त, सांसद, राज्य मानवाधिकार आयोग मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है। डीआरडीए के कर्मचारी सुसाइडल नोट गायब होने के इस दावे के साथ- साथ न्यायिक जांच की भी मांग कर रहे हैं और अपना बयान कलमबंद कराने की पेशकश भी कर रहे हैं। ऐसे में जांच और भी जरूरी हो गई है। कर्मचारियों ने बयान कलमबंद कराने की मंशा प्रकट कर यह साफ कर दिया है कि वे जांच अधिकारी को हर तरह से सहयोग करना चाहते हैं।

हो रही है जांच

क्यों जरूरी है जांच

^मामले की जांच पुलिस कर रही है। इस मामले में अन्य पदाधिकारियों से भी बात की जाएगी। कर्मचारियों द्वारा दिए गए