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बच्चों ने जाना राजा हरिश्चन्द्र को

7 वर्ष पहले
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चाईबासा | पाठकमंच की साप्ताहिक कार्यक्रम ‘इन्द्रधनुष‘ की 422वीं कड़ी की प्रस्तुति चिन्मय दत्ता की अध्यक्षता में हुई। इसमें बच्चाें ने सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र की सच्चाई के प्रति निष्ठा से अवगत हुए। उनका अधिक समय पुण्य तप में ही बीतता था। राज्य में सत्य का ही शासन था। राजा हरिश्चन्द्र के राज्य में न्याय का तराजू सबके लिए बराबर था। गुरु वशिष्ठ ने विश्वामित्र से जब राजा की सत्य-प्रियता, उदारता और दान-शीलता की प्रशंसा की तो उन्हें यह बात सही नहीं लगी। उन्होंने वशिष्ठ के आग्रह करने पर विश्वामित्र ने राजा की परीक्षा लेने का निश्चय किया। हरिश्चन्द्र अपनी रानी शैव्या और पुत्र रोहित को एक ब्राह्मण के हाथ दान कर दिया। स्वयं एक चंडाल की दासता करने लगे। अनंत विपत्तियों में भी मनुष्य को धैर्य नहीं खोना चाहिए। यही शिक्षा सत्यवादी हरिश्चन्द्र की जीवनी से मिलती है। मौके पर शिवानी दत्ता ,मनीष कुमार चैपाल एवं अभिषेक निषाद समेत सुकुमार दत्ता, शीतल बाहन्दा, देवकी दास, अनमोल गोप, अनिमेश कुमार, नेहा कुमारी निषाद, सुकुमार दत्ता, अभिनाश दास, सिमरन ठाकुर, राम दास, स्नेहा महतो, विपोधरण मुखर्जी, अंकित दास, खुशबू दास, शोभा कुमारी दास, शिवम बाहन्दा, श्रुति कुमारी, शंकर गोप, प्रीतम गोप, अभिषेक खंडाइत, करण निषाद, समृद्ध कुमार, सोनू कर्मकार, गोलू कर्मकार समेत कई बच्चे मौजूद थे।