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‘हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की जरुरत’

7 वर्ष पहले
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पद्मावतीजैन सरस्वती शिशु विद्या मंंदिर में हिन्दी दिवस मनाया गया। मौके पर प्राचार्य सुरेन्द राय ने कहा कि अपनी भाषा में अभिव्यक्ति की सार्थकता जितनी सहज सरल ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है वैसा दूसरी भाषा में संभव नहीं है। रविन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी मातृभाषा बांग्ला गीतांजली में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ है। आजादी के बाद अभी तक हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में जो पहचान मिलनी चाहिए थी, वह अब तक नहीं मिली है। इसके लिए हमें एक जन आंदोलन की आवश्यकता है। विनोबा भावे ने कहा था कि हिन्दी गंगा नदी की तरह है। मौके पर विद्यालय में तीन चरणों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रथम चरण में पाठ में प्रथम श्रीतु गुप्ता, शारदा सदन, द्वितीय प्रगति कुमारी, निवेदिता सदन एवं तृतीय आर्यन कुमार विवेकानंद सदन और तृतीय चरण में प्रश्न मंच प्रतियोगिता बाल वर्ग में प्रथम निवेदिता, द्वितीय शारदा एवं किशोर वर्ग में प्रथम शारदा सदन, द्वितीय विवेकानंद सदन रहा इस अवसर पर सभी भैया- बहन एवं आचार्य उपस्थित थे।

डीएवी में मनाया गया हिंदी दिवस

डीएवीस्कूल झींकपानी के सभागार में हिंदी दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर 13 से 19 सितंबर तक सभी विद्यालय के कार्यकलाप हिंदी में करने का संकल्प लिया गया। छात्र-छात्राओं ने अपनी-अपनी प्रतिभाओं का उच्च स्तरीय प्रर्दशन किया। सभागार में हिंदी से संबंधित आकर्षक प्रेरक माॅडल, चार्ट, कविताएं सूक्तियों का संकलन एक अनूठा प्रयास सराहनीय रहा। प्राचार्य ओपी मिश्रा ने हिंदी दिवस हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा ही राष्ट्रभाषा होती है। भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता दीं। उसके बाद से प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

आयोजित क्वीज प्रतियोगिता में भाग लेते स्कूली बच्चे।