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घोषणा-पत्र में

7 वर्ष पहले
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2001 की जनगणना के अनुसार 407200 बाल श्रमिक थे। सबसे ज्यादा 4.78 % 10 से 14 वर्ष की आयु वर्ग में थे।

पूरे राज्य में हैं बाल श्रमिक

बचपन पर बोझ

दो प्रकार के हैं बाल श्रमिक

ताकि छोटू को होटल में काम करना पड़े

2001 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार झारखंड राज्य में विभिन्न कामों में लगने वाले कुल श्रम का 3.2 फीसदी बाल श्रम है।

यह मुद्दा होगा किस

माता-पिताने उसका नाम अजय रखा था, लेकिन जब उसने उसने होटल में काम शुरू किया है कोई उसे छोटू कहता है तो कोई छटंकी। अब तो उसे अपना नाम भी याद नहीं है। घरवालों ने होटल के काम में लगा दिया कि अच्छा खाएगा तो तंदरुस्त रहेगा। सुबह सात से रात 11 बजे तक काम के एवज में उसे 70 रुपए मिलते हैं। उसके पांव और हाथों पर अनेक जले के निशान है जो होटल के मालिक ने छोटी छोटी गलतियों पर उसे ईनाम में दिए हैं। अजय राज्य के उन 40.71 फीसदी बच्चों में से एक है जो दिन रात पसीना बहाकर दो जून की रोटी जुटाने में लगे हैं। लेकिन, विकास की रफ्तार को हजार गुणा करने का वादा करने वाली पार्टियों के एजेंडे में छोटू के घावों की चिंता नहीं हैं। आज तक किसी दल ने अपने घोषणा पत्र में बालश्रम उन्मूलन की बात नहीं की। क्या सिर्फ इस लिए कि बालश्रम उनके वोट बैंक को प्रभावित नहीं करता?