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कृष्ण-सुदामा मिलन की बही रसधारा, झूमे श्रद्ध‌ालु

7 वर्ष पहले
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श्रीमदभागवतकथा के अंतिम दिन मंगलवार को बाल व्यास पंडित विवेक जी महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा चरित का मधुर संगीतमय वर्णन किया। महाराज जी ने सुदामा जी के चरित्र तथा उनके बाल सखा भगवान श्रीकृष्ण जी के द्वारकाधीश बनने के बाद उनसे भेंट करने के लिए मथुरा आने के प्रकरण का करुण उपाख्यान किया। उन्होंने द्वारपालों द्वारा सुदामा को वहां से भगाने यह समाचार सुनकर भगवान श्रीकृष्ण का व्याकुल हो जाने, उन्हें खोजने के लिए नंगे पांव द्वारका की गलियों में दौड़ लगाने का संगीतमय व्याख्यान किया।

इसे सुनकर लोगों की आंखों से आंसू छलक पडे़। भागवत भगवान की आरती के साथ ही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की परिसमाप्ति प्रसाद वितरण के साथ हो गई।

भागवत कथा में मौजूद महिलाएं

भागवत कथा में कृषण, सुदामा और रुक्मिणी की झांकी।