राज्य के लिए दी जान अब परिवार है गुमनाम
झारखंडअलग राज्य के आंदोलन में कई आंदोलनकारियों की जान चली गई। ऐसे ही वीर आंदोलनकारियों में एक मछुआ गागराई थे। झारखंड आंदोलन के दौरान उनकी हत्या साजिश के तहत कर दी गई थी। उसके बाद से उन्हें शहीद का दर्जा देते हुए पूरे सिंहभूम के लोग उन्हें 11 दिसंबर को याद करते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उनके गांव परिजनों की सुध किसी ने नहीं ली। झारखंड बनने के 14 वर्ष बाद भी नकटी पंचायत के तेंदा गांव की ओर किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं गया। स्मृति के नाम पर रांची-चक्रधरपुर एनएच के किनारे नाकटी के पास एक स्टैच्यू मछ़ुआ गागराई का बना हुआ है।
शहीद मछुआ की प्रतिमा का रंग-रोंगन करता युवक।
^मेरे पति ने झारखंड लड़ाई में अपनी जान गंवा दी, लेकिन अब तक मेरे परिवार को अलग राज्य बनने के बाद भी कुछ नहीं मिला है। गांव का हाल भी बेहाल है। केवल शहादत दिवस पर आश्वासन ही अब तक मिला है।^रांदाई गागराई,शहीदकी विधवा
11 दिसंबर को हुई हत्या
मछुवागागराई झारखंड आंदोलन का बड़ा चेहरा थे। मनोहरपुर विधानसभा से चुनाव लड़ चुके थे। लेकिन आपसी रंजिश राजनीतिक साजिश के कारण 11 दिसंबर 1987 को नाकटी हाट टांड में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के बाद उनका परिवार काफी मुश्किल हालात में जी रहा है। हालांकि राज्य के कई मंत्री, डिप्टी सीएम ने इस परिवार को नौकरी मुआवजा का आश्वासन दे चुके हैं। नाकटी हाट मैदान में 11 दिसंबर को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी शहादत दिवस मनाया जाएगा। इस मौके पर झामुमो की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।