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ब्राह्मणी पत्ते से विक्षिप्त महिला का हुआ इलाज

7 वर्ष पहले
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35वर्षीय सुशीला कांडेयांग का मानसिक संतुलन चार माह पूर्व अचानक बिगड़ गया था। इसके बाद डॉक्टर, वैद्य, झाड़-फूंक पूजा-पाठ सबकुछ हुआ लेकिन महिला की सेहत में सुधार नहीं हुआ। अंत में परिजनों ने जल पथ प्रमंडल के लिपिक तुराम देवगम से गुहार लगाई। जड़ी- बूटी के जानकार तुराम देवगम ने ब्राह्मणी साग नामक लत्तर वाले पौधे से बिना पैसे खर्च किए ही महिला का इलाज कर दिया। चाईबासा-चक्रधरपुर-सरायकेला मार्ग के सुफलसाई गांव में रहने वाली सुशीला दो दिनों के उपचार के बाद अब काफी ठीक है। वह अपने पांच बच्चों की देखभाल पहले की तरह करने लगी है। उसकी दिमागी हालत अप्रैल में अचानक खराब हो गई थी। परिजनों ने पहले तो डॉक्टर से इलाज करवाया, लेकिन जब दवा काम नहीं आई तो दुआ की गई। लिहाजा शुरू हो गया पूजा- पाठ झाड़- फूंका का दौर। इस दौरान सुशीला की हालत ठीक होने के बजाए बिगड़ती गई।

जड़ी- बूटी से हर इलाज संभव

लिपिकने कहा कि अशिक्षा के कारण गांवों में अब भी अंधविश्वास की जड़ें खत्म नहीं हुई हैं। इस वजह से लोग बीमार होने पर पूजा- पाठ का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि जड़ी- बूटी से कई रोगों का इलाज बिना पैसे के ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पैसे के अभाव में इलाज नहीं करा पाने वाले गरीब मरीजों की मदद के लिए वे हमेशा तत्पर हैं। उन्होंने दावा किया कि मानसिक बीमारी सहित अन्य रोगों के मरीजों का उपचार घरेलू नुस्खे जड़ी- बूटी से संभव है। इलाज करने वालों को केवल जड़ी- बूटी की पहचान उसकी मात्रा का ज्ञान होना चाहिए।

घर के अहाते में ही तलाशी औषधि

पिछलेहफ्ते विक्षिप्त अवस्था में सुशीला जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में घुस गई और लोगों द्वारा मारने से बचाने की गुहार लगाने लगी। वहां मौजूद विभाग के कर्मियों ने लिपिक तुराम देवगम को बुलाया। उसने सुशीला को 24 घंटे में ठीक कर देने का भरोसा दिलाया। इसके बाद तुराम देवगम ने सुशीला के बच्चों को साथ लेकर उसके घर के अहाते में ही ब्राह्मणी साग की तलाश की। साग की दवा बनाकर सुशीला को दी गई, जिसके बाद उसकी स्थिति में सुधार रहा है। तुराम देवगम ने परिजनों को एक सप्ताह तक सुशीला को ब्राह्मणी साग का सेवन कराते रहने को कहा है, लेकिन दो दिन पर बाद ही केवल सुशीला पूरी तरह स्वास्थ्य हो गई।

अब मैं स्वास्थ्य हूं

^मेरीदिमागी हालत अचानक खराब हो गई थी। लिपिक की औषधि