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नेताओं ने बोले सिर्फ बड़े-बड़े बोल

7 वर्ष पहले
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इन मुद्दों को किसी ने नहीं छेड़ा

>>चक्रधरपुर रेलवे ओवरब्रिज।

>> टोकलो, कराईकेला को अलग प्रखंड।

>> टोकलो-कुचाई-चक्रधरपुर केरा सड़क।

>> गुदड़ी आनंदपुर के अधूरे प्रखंड।

>> नक्सलवाद उन्मूलन जंगल इलाके का विकास।

>> नाकटी पनसुवां डैम का पानी खेतों तक पहुंचे।

>> झरझरा डैम बनाने का लाभ।

>> चक्रधरपुर शहरी जलापूर्ति योजना।

>> रेलवे के अलावा अन्य चिकित्सकीय सुविधा।

>> कचरा प्रबंधन योजना चक्रधरपुर।

>> मनोहरपुर का समीज पुल बनाने।

दो पुल दो राज्यों को जोड़ेंगे

चक्रधरपुर के लिए ओवरब्रिज एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन इस चुनाव में किसी ने छेड़ा तक नहीं। किसी ने मंच से इस पर कुछ नहीं बोला। पिछले 30 सालों से लोग ओवरब्रिज की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक दल अब तक वादा ही करते आए हैं। भविष्य में और परेशानी बढ़ेगी।

प्रखंडबने तो होगा विकास

टोकलोकराईकेला को अलग प्रखंड बनाने की मांग 25 साल पुरानी है। इसके बावजूद दोनों को अलग प्रखंड नहीं बनाया जा रहा है। अलग प्रखंड बना तो टोकलो क्षेत्र की आठ पंचायतों का समुचित विकास होगा। वहीं 60 किमी दूरी तय कर लोगों को पेंशन आदि फार्म जमा करने बंदगांव नहीं जाना पड़ेगा।

क्यों जरूरी है ये

^विधानसभा चुनाव में धनबल के प्रभाव के कारण सामाजिक मुद्दे गौण होते जा रहे हैं। इस बार के चुनाव में मैनें देखा कि लोकल मुद्दे पर किसी ने कोई टीका टिप्पणी नहीं की। दरअसल जनता की नब्ज भी राजनीतिक दल जान गए हैं। यह कहावत सही प्रतीत होती है कि बेशर्म राजा और सोई जनता देश के लिए घातक होते हैं। यहां ऐसा आंशिक मात्र हुआ होगा। परंतु राजनीतिक परिदृश्य मे देखेंगे तो जनता को अब आगे आना होगा। चिकनी-चुपड़ी बातों पर लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा।^ प्रोफेसरएनके प्रधान, प्राचार्य,जेएलएन कॉलेज, चक्रधरपुर

लोकल मुद्दे के गौण होने का कारण

^झारखंड लगातार उपेक्षा का दंश झेल रहा है। इस राज्य के विकास के लिए राजनीतिक दलों के पास कोई विजन नहीं है। यही कारण है कि चुनाव में भी कोई क्लीयर विजन लेकर जनता के पास नहीं पहुंचा। स्थानीयता जैसे मुद्दे गायब रहे। झारखंड नामधारी पार्टियों के पास लोकल मुद्दे छिटपुट रहे। कोल्हान की बात करें तो यहां के चुनाव में पूरी तरह से राज्य केंद्र स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का युद्ध चला। जनता भी ठगी सी रही। इस बीच चुनाव भी हो गया। लोकतांत्रिक व्यवस्था