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टेंडर मिले ना मिले,पहले ही शुरू कर दिया काम
जिलेमें इंजीनियरों और ठेकेदारों की मनमानी चल रही है। यही कारण है कि पथ निर्माण विभाग की दो योजनाओं में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही करीब 30 फीसदी का काम पूरा हो गया है। दोनों योजनाएं भोया-पांड्राशाली सड़क के आठ लाख के दो टॉ वाल (गार्डवाल)निर्माण से जुड़ी हैं। दोनों योजनाओं का टेंडर 22 जनवरी को खुला है। इसका टेंडर एलॉट पेपर 1 फरवरी को पथ निर्माण विभाग चाईबासा के पास पहुंचा है। इससे पहले ही पथ के चेन नंबर 3 प्लस 750 2 प्लस 600 किमी संख्या में दोनों योजनाओं में 30 फीसदी काम एक विभाग के ठेकेदार वकील खान द्वारा कर दिया गया है। अब यह मामला तूल पकड़ लिया है। सिंहभूम के सांसद लक्ष्मण गिलुवा चक्रधरपुर के विधायक शशिभूषण सामड़ ने पूरे मामले में कार्यपालक अभियंता मनोरंजन सिन्हा की खास ठेकेदारों से मिलीभगत का नतीजा बता कर डीसी से जांच की मांग की है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही हुआ काम।
भोया-पांड्राशाली रोड में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही योजना का काम शुरू।
ऐसे खुला मामला
12जनवरी को पथ निर्माण विभाग ने पत्रांक 17/ 14 -15 के तहत टेंडर निकाला था। जिसमें गैर योजना विवेकाधीन मद से भोया-पांड्राशाली पथ पर दो जगहों पर टॉ वाल बनाने का टेंडर था। इसमें निविदा चाईबासा पथ निर्माण कार्यालय रांची स्थित मुख्य अभियंता के कार्यालय में 22 जनवरी को खुली। इसमें चाईबासा में दो ठेकेदारों ने विभाग से सेटिंग कर पेपर डाल दिया। जबकि चक्रधरपुर के ठेकेदार काका कदम ने रांची में 5 प्रतिशत लेस रेट पर पेपर डाल दिया। 1 फरवरी को टेंडर पेपर पथ निर्माण विभाग कार्यालय चाईबासा पहुंचा है। इधर 5 प्रतिशत लेस में टेंडर डालने वाले ठेकेदार काका कदम योजना स्थल की जांच को पहुंचे तो वे हैरान रहे गए कि काम उन्हें कराना था लेकिन कोई और ठेकेदार 30 फीसदी काम करा चुका है। जानकारी अनुसार जो ठेकेदार काम कराया है वह अक्सर विभाग के कार्यपालक अभियंता की कृपा से टेंडर से पहले ही काम चालू करा देता है। इन दोनों योजनाओं में भी शिड्यूल रेट पर ठेकेदार काम करा रहा है, जबकि 5 फीसदी कम दर पर ठेकेदार काका कदम का काम स्वीकृत हुआ है।
क्या होना चाहिए
टेंडरप्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्क ऑर्डर जिस ठेकेदार को मिलेगा वही काम कराएगा। टेंडर प्रक्रिया में जो शिड्यूल रेट है, उससे कम रेट पर अगर कोई ठेकेदार पेपर डालता है तो उसे ही ठेकेदारी मिलती है। लेकिन इस मामले में क्लीयर है कि विभागीय अभियंता ने टेंडर डालते ही शिड्यूल रेट पर पेपर डालने वाले ठेकेदार से काम चालू करा दिया है।
जनप्रतिनिधिभी हैं नाराज
सांसदके पत्र में क्या : दोनों योजनाओं की हेराफेरी तो एक नमूना है। ऐसी कई गड़बड़ियां हैं। जिस पर सांसद ने 28 जनवरी को ही पीडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता मनोरंजन सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। जिसमें कहा गया है कि श्री सिन्हा अपने दो चहेते ठेकेदार वकील खान नसीम खान के साथ सेटिंग कर टेंडर से पहले ही काम कराते हैं। सांसद ने डीसी से जांच की मांग की है।
विधायकके पत्र में क्या
विधायकशशिभूषण सामड़ ने भी पीडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता मनोरंजन सिन्हा के कार्यकाल की सभी योजनाओं की जांच की मांग की है। 1 फरवरी को डीसी को लिखे पत्र में कहा गया है कि योजनाबद्ध तरीके से प्राक्कलन तैयार हुआ है।