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दो नावों के सहारे, 24 गांवों की जिंदगी

7 वर्ष पहले
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इसबरसात के मौसम में कोयल नदी उफान पर है और 20 हजार से ज्यादा की आबादी प्रखंड मुख्यालय आनंदपुर से कट गई है। 24 गांवों में रहने वाले इन ग्र्रामीणों का इस बारिश में एक मात्र सहारा दो लकड़ी की नाव हैं। इसी नाव के सहारे ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय पहुंचते हैं और रोजमर्रा के सामानों की खरीदारी करते हैं। तीन माह तक ग्रामीण टापूनुमा की जिंदगी जीते हैं। ग्रामीणों के लिए समीज आश्रम के समीप एक पुल बन रही है, पर विभिन्न कारणों से पिछले 11 सालों से काम ठप पड़ा हुआ है।

पानी कम होने पर काम चालू होगा

इधरसमीज आश्रम में पुलिया बनाने की मांग पर विधायक गुरुचरण नायक ने कहा है कि नदी में पानी ज्यादा रहने के कारण पुलिया का काम नहीं बढ़ पाया है। पानी घटते ही पुल के काम तेजी आएगी। लंबे समय से पुलिया का काम अटका पड़ा है। ठेकेदार को निर्देश दिया गया है।

ये गांव हैं प्रभावित

रोआम,पारलीपोस, महूलडीहा, सेरेंगदा, कमाय, बड़पोस, ईचापीड़, घाघरा, ढीपा, रायडीह, सोनपोखरी, पौसेता, गुलरूंआ, बारहटुंगरी सहित अन्य गांव।

पुलको जल्द बनाने की मांग

^बारिशके दिनों में नदी से होकर पार होना मुश्किल होता है। नाव ही बरसात में सहारा है। सरकार से आग्रह है कि पुल को जल्द से जल्द बना दिया जाए ताकि ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय जा सकें। ^ मुकुटलुगुन , ग्रामीण

नाव से आनंदपुर प्रखंड मुख्यालय जाते ग्रामीण