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दूसरे दिन भी थमे रहे पहिए

7 वर्ष पहले
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भाकपामाओवादियों द्वारा बुलाए गए दो दिवसीय नक्सली बंदी का सबसे अधिक असर लम्बी दूरी के वाहनों पर पड़ा। रविवार सोमवार को रांची, टाटा, पटना, किरीबुरू, चक्रधरपुर गया आदि के लिए चलने वाली लगभग 70 बसों का परिचालन बंद रहा। इससे लाखों रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। परिवहन कार्य से जुड़े लगभग 100 लोग सोमवार को भी स्टैंड में यूं ही समय काटते पाए गए। रविवार को ही बंदी की खबर क्षेत्र में फैल गई थी, इसलिए बस यात्रा के लिए सोमवार को इक्का दुक्का लोग ही पहुंचे। बंदी का असर बाजार पर नहीं दिखा। सामान्य दिनों की तरह सभी क्षेत्र में दुकानें खुली रहीं। जिउतिया पर्व को लेकर भी बाजार में लोगों की गहमा-गहमी बनी रही। वहीं रेल मार्ग पर भी यातायात सामान्य रहा। बंदी को देखते हुए पुलिस प्रशासन की गस्ती भी तेज रही। कही-कहीं कुछ दुकानें जो सवेरे बंद थीं शाम चार बजे के बाद खोल दी गई।

चाईबासा। नक्सली बंदी के दौरान स्टैंड में खड़ी बसें

नोवामुंडी: नक्सलीबंदी का असर लौह अयस्क के कारोबार पर दिखाई दिया। लौह अयस्क की ढुलाई करने वाले डंपरों का परिचालन नहीं के बराबर हुआ। वहीं छोटे वाहनों की आवाजाही सामान्य रही। बाजार पर इसका मिलाजुला असर हुआ। कुछ दुकानें बंद तो कुछ खुली रहीं।

किरीबुरू: नक्सलीबंदी को देखते हुए किरीबुरू से रांची ,टाटा चाईबासा के लिए चलने वाली बसों के पहिए सोमवार को भी थमे रहे। खनन कार्यों से जुड़ा परिवहन भी पूरी तरह से प्रभावित रहा। किरीबुरू से बड़ाजामदा तक सड़क पर छोटे चारपहिया वाहनों का परिचालन कम ही हुआ। हालांकि हाट बाजार पर इसका कम असर रहा।

खदान प्रबंधकों को दो करोड़ का नुकसान

गुवा|भाकपामाओवादियों का बंद गुवा तथा बड़ाजामदा के शहरी क्षेत्रों में बेअसर रहा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर देखा गया। शहरी क्षेत्रों में स्कूल, कार्यालय, बाजार, दुकानें आम दिनों की तरह खुले रहे। सरकारी बैंकों में भी कामकाज सामान्य रहा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा रहा। नक्सली बंद के कारण गुवा स्थित रूंगटा खदान बंद रही, वहीं बड़ाजामदा स्थित उषा मार्टिन की खदान में भी कोई कामकाज नहीं हुआ। खदानें बंद रहने से सड़कें सूनी रहीं, हालांकि इस दौरान छोटे वाहन सामान्य दिनों की तरह चले। खदान बंद रहने से रेलवे को 50 लाख, पेट्रोल पम्प मालिकों को 5 लाख तथा खदान प्रबंधकों को लगभग दो करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।