मां विद्या की दो दिन होगी आराधना
विद्याकी देवी मां सरस्वती की आराधना 2016 में दो दिन होगी। पंचांगों और पंडितों की अलग-अलग राय है। पंचांग को आधार मानें तो 12 फरवरी से विद्या दायिनी मां सरस्वती की पूजा अर्चना होगी। जिसे लेकर स्कूली विद्यार्थियों और मुहल्लों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। वहीं शुक्रवार को पूजा करने को लेकर दंदासाई स्थित मूर्तिकारों से मां की प्रतिमा भी भक्तों द्वारा ले जाई गई।
इधर शहर के बाटा रोड हनुमान मंदिर के पंडित अश्विनी पाठक बताते हैं कि 12 फरवरी को मां सरस्वती की पूजा शुभ नहीं है। 13 फरवरी को सूर्योदय से ही मां सरस्वती की पूजा शुभ है। लिहाजा जो भी पूजा करें धार्मिक विधि से करें। बहरहाल पूजा का बाजार चरम पर है। मौसम का साइड इफेक्ट मूर्ति के कारोबार पर पड़ा है।
तैयारीशुरू, बाजार में रही भीड़भाड़
12फरवरी को ही मां सरस्वती की पूजा अर्चना को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जिसे लेकर गुरुवार को चक्रधरपुर बाजार में लोगों की भीड़ लगी रही। स्कूली बच्चे पूजा सामग्री खरीदने बाजार पहुंचे। पूजा को लेकर बाजार में चहल-पहल थी।
मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप देता मूर्तिकार।
13 फीट की प्रतिमा
6ईंच से 13 फीट तक की प्रतिमा का निर्माण किया गया है। चाईबासा के तेलांगजुरी गांव के युवकों ने 13 फीट ऊंची मां सरस्वती की प्रतिमा बनवाई है। जिसकी कीमत 18 हजार रुपए है। इस प्रतिमा का निर्माण चक्रधरपुर के दंदासाई में मूर्तिकार सुधीर पाल बना रहे हैं।
ये भी जान लीजिए
मां सरस्वती की पूजा : 13फरवरी
कितनीप्रतिमा शहर में बनती हैं : 1100
प्रतिमाकी दर : 200से 18000 रुपए तक
प्रतिमाकी ऊंचाई : 6ईंच से 13 फीट तक
कितनीजगह प्रतिमा स्थापित होगी : लगभग600 (चक्रधरपुर अनुमंडल)
^मौसम अच्छे होने के कारण प्रतिमा बनाने में मजा रहा था। अचानक बादल जाने से प्रतिमा को फाइनल टच देने में परेशानी हो रही है। रंग को जल्दी सूखने के लिए स्प्रे मशीन का सहयोग लिया जा रहा है। हालांकि इससे खर्च बढ़ रहा है। सरोजपाल, मूर्तिकार दंदासाई
^मौसमके बदलने से समय पर प्रतिमा देने में दिक्कत होती है। मिट्टी और रंग ठीक से नहीं सूखने से प्रतिमा की रौनक कम हो जाती है। सबसे ऊंची 13 फीट की प्रतिमा चाईबासा के लिए बनाई गई है। 12 फरवरी को अधिकांश स्कूलों में पूजा के लिए प्रतिमा का ऑर्डर आया है।
इधर मौसम का साइड इफेक्ट
धूपनहीं खिली, कैसे सुखेगी मूर्ति, चिंता में पड़े मूर्तिकार : दो दिन पूजा होने से मूर्तिकार सुविधा अनुसार प्रतिमा को फाइनल टच दे रहे हैं। लेकिन गुरुवार को सूर्यदेव के नहीं निकलने से 12 फरवरी को मां सरस्वती की पूजा करने वालों को प्रतिमा गुरुवार को देना मूर्तिकारों के लिए मुश्किल हो रहा है। धूप नहीं होने से रंग नहीं सूख रहा है। रंग को सुखाने के लिए स्प्रे मशीन का सहारा लिया जा रहा है।
ये होंगे फायदे में
दोदिन मां सरस्वती की पूजा होने से इसमें सबसे ज्यादा लाभ पंडितों और मूर्तिकारों को होगा। मूर्तिकारों को यह सहूलियत होगी कि जिन्हें 12 फरवरी को पूजा करना है। उनकी प्रतिमा पहले तैयार करेंगे। वहीं 13 फरवरी को पूजा करने वालों की प्रतिमा को सजाने के लिए उन्हें समय मिल जाएगा। ज्यादा जगहों पर पूजा करने वाले पंडितों को भी राहत मिलेगी।
12को पूजा , परीक्षा है मुख्य कारण
सरकारीस्कूलों में वार्षिक परीक्षा होनी है। वहीं हाई स्कूलों में 16 फरवरी से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा शुरू हो रही है। परीक्षा को देखते हुए मां सरस्वती की पूजा 12 फरवरी को की जा रही है। सुविधाओं को देखते हुए कलेंडर को आधार मान तथा पंडितों से वार्ता कर अधिकांश स्कूलों में 12 फरवरी को ही पूजा की जा रही है।
108 बार मंत्र का करें जाप
^13फरवरी को प्रात: सूर्योदय से मां सरस्वती की पूजा शुभ है। इस दौरान ऐं सरस्वत्यै नम: मंत्र 108 बार जाप करने पर मंत्र के प्रभाव से विद्या बुद्धि बढ़ती है। 12 की बजाए 13 फरवरी को मां सरस्वती का पूजा करें, लाभ अवश्य मिलेगा। पंडितअश्विनी पाठक, हनुमान मंदिर बाटा रोड।