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सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : एसपी

7 वर्ष पहले
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चाईबासामें मंगलवार को राज्य की सबसे बड़ी जेल ब्रेक हाेने की घटना के बाद घाटशिला उपकारा और कोर्ट परिसर स्थित हाजत की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

कैदियों की सुरक्षा के बाबत बुधवार को ग्रामीण एसपी शैलेंद्र सिन्हा, एसडीपीओ पूज्य प्रकाश और इंस्पेक्टर प्रेमनाथ ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीण एसपी श्री सिन्हा ने कोर्ट हाजत की सुरक्षा में तैनात जवानों को निर्देश दिया कि किसी भी हालत में कैदियों की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट परिसर स्थित हाजत के समीप बनी दीवार को ऊंचा करने और कोर्ट के दोनों गेट को बंद रखने का आदेश दिए। कोर्ट हाजत में महिला पुलिसकर्मी को तैनात देखकर पूछा कि यहां पर महिला पुलिसकर्मी क्यों है। जेल हाजत में बंद महिला कैदी को देखकर चुप हो गए। इसके बाद वहां से चाकुलिया के लिए रवाना हो गए।

कोर्ट परिसर स्थित कैदी हाजत का निरीक्षण करते ग्रामीण एसपी शैलेंद्र सिन्हा,एसडीपीओ पूज्य प्रकाश,इंस्पेक्टर प्रेमनाथ

पहले भी मिर्ची फेंक चुके हैं नक्सली

चाईबासाजेल से नक्सलियों के भागने की यह पहली घटना नहीं है। इसके पूर्व में भी मिर्ची फेंक कई हार्डकोर नक्सली भागने में सफल रहे हैं। विगत 17 जनवरी 2011 को जेल में बंद हार्डकोर नक्सली रघुनाथ हेंब्रम उर्फ निर्भय जी, माेतीलाल सोरेन उर्फ संदीप दा आदि कई नक्सली भागने मेें सफल रहे हैं। जिसमें जेल अधीक्षक मो समसुद्दीन को तत्काल सस्पेंड कर नक्सलियों को भगाने के आरोप में जेल भेज दिया गया था।

उपकारा से भी भाग चुके हैं कैदी

जेलप्रशासन की लापरवाही और सुरक्षा में चूक की वजह से 3 मार्च 2014 सोमवार की शाम घाटशिला कोर्ट से गाड़ी में बैठने से पहले ही तीन कैदी फरार हो गए थे। इसमें एक को कैदी वाहन के चालक सुनील कुमार ने दौड़ा कर पकड़ लिया था। बाकी दो कैदी भागने में सफल रहे थे। इसमें एक हार्डकोर नक्सली फोगड़ा मुंडा और दूसरा हत्यारोपी होपना बास्के शामिल था। जो आज तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। जानकारी हो कि घाटशिला उपकारा में 1 दर्जन से भी अधिक हार्डकोर नक्सली बंद हैं।