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90 प्रतिशत सबर आज भी अशिक्षित

7 वर्ष पहले
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चाकुलिया | प्रखंडके विभिन्न गांवों में रहने वाले आदिम जनजाति (सबर) के लोग विकास के मामले में आज भी काफी पीछे हैं। सबरों की 90 प्रतिशत से ज्यादा आबादी अशिक्षित है। अशिक्षा अज्ञानता के कारण ये अपना भविष्य संवारना तो दूर उसके बारे में सोचने में भी काफी पीछे हैं। प्रतिदिन एक ही जीवनशैली है इनकी। ये उतना ही कमाते हैं जीतना में पेट भर जाए। इन्हें बच्चों और परिजनों के स्वास्थ्य और शिक्षित करने की कोई सोच नहीं है। ये शाम सुबह शराब में ही डूबे रहते हैं। सरकार ने रहने को बिरसा आवास और अंन्त्योदय कार्ड के मार्फत 35 किलो राशन तो दे दिया है। ये लोग उससे ही संतुष्ट हैं। बिरले ही इस जाति के लोग मैट्रिक से ऊपर की शिक्षा ग्रहण करते हैं। रोजगार का अधिकांश हिस्सा देशी शराब की अवैध भट्ठियों में चला जाता है। बीते मंगलवार को सुनसुनिया के सबर टोला में शराबी पति द्वारा पीट-पीट कर अपनी प|ी की हत्या किए जाने के पश्चात जब थाना प्रभारी विक्रमा राम ने हत्यारोपी के घर की तलाशी ली तो दंग रह गए।