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करनी पड़ रही है जेब ढीली

7 वर्ष पहले
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नगरपंचायत से तो बेहतर चाकुलिया ग्राम पंचायत ही था। जहां नियमों का हवाला देकर कम से कम आम लोगों को परेशान तो नहीं किया जाता था। नगर पंचायत क्या बना जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए चिकित्सकीय रिपोर्ट बनाने के लिए लोगों को मजबूर किया जाने लगा है। जबकि इन प्रमाण पत्रों के लिए चिकित्सकीय रिपोर्ट कोई बाध्यता नहीं है। आम तौर पर सरकारी अस्पताल, नर्सिंग होम, प्राइवेट क्लीनिक में जन्म या मृत्यु होने पर चिकित्सकीय रिपोर्ट दी जाती है, परंतु घर पर साधारण रूप में किसी का जन्म या मृत्यु होने पर परिजनों को नगर पंचायत कार्यालय रिपोर्ट के लिए प्राइवेट चिकित्सकों का चक्कर काटना पड़ रहा है। चिकित्सकीय रिपोर्ट के नाम पर परिजनों को बेवहज जेब ढीली करनी पड़ रही है। हालांकि इस पर बोर्ड के सदस्यों ने कई बार एतराज भी जताया, परंतु कर्मियों की अकर्मण्यता के कारण कोई हल नही नकला।

जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अश्विनी कुमार के मुताबिक पीएचसी, सीएचसी, नर्सिंग होम आदि में जन्म या मृत्यु होने पर चिकित्सकीय रिपोर्ट की आवश्यकता है। घरों में साधारण जन्म मृत्यु पर चिकित्सकीय रिपोर्ट की बाध्यता नहीं है।

^घरों में साधारण मृत्यु जन्म होने पर चिकित्सकीय रिपोर्ट देना संभव नहीं। सीएचसी में जन्म मृत्यु होने पर मैं स्वयं बतौर रिजस्ट्रार प्रमाण पत्र निर्गत करता हूं फिर भी बेवजह रिपोर्ट के नाम पर लोगों द्वारा दबाव बनाया जाता है। ^डा.सुरेश चंद्र महतो, प्रभारीचिकित्सा पदाधिकारी, चाकुलिया।

अलग-अलग है पदाधिकारियों की राय

^जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए चिकित्सकीय रिपोर्ट कोई बाध्यता नहीं है। शहरी क्षेत्र में नपं कर्मियों, जनप्रतिनिधियों द्वारा सत्यापन कर प्रमाण पत्र निर्गत किया जा सकता है। ^ अश्विनीकुमार, जिलासांख्यिकी पदाधिकारी, जमशेदपुर

^इसमामले में मैं मार्गदर्शिका का अनुसरण करुंगा। नियमानुसार होने पर चिकित्सकीय रिपोर्ट प्रमाण पत्र के लिए बाध्यता नहीं होगी। ^ गणेशमहतो, प्रभारीकार्यपालक पदाधिकारी, नपं चाकुलिया

^प्रमाणपत्र के लिए लोगों को परेशान करना गलत है। नियमत: प्रमाण पत्र के लिए चिकित्सकीय रिपोर्ट कोई बाध्यता नहीं होनी चाहिए। इस विषय पर चर्चा की जाएगी। ^ श्रीनाथमुर्मू, चेयरमैननगर पंचायत बोर्ड, चाकुलिया।

गांवों में नहीं होती है दिक्कत

प्रखंडके ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर ऐ