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किसानों की मेहनत से बंजर भूमि पर उगी फसल
बंजर भूमि में लहलहाती गेंहू की फसल को दिखाते किसान।
किसानों द्वारा निर्मित नाला।
अंजनी जायसवाल | दुलमी
रामगढ़जिले के दुलमी प्रखंड स्थित चटाक गांव के किसानों की अथक मेहनत अब रंग आती दिखाई दे रही है। गांव के किसानों ने चटाक गांव के दो सौ एकड़ बंजर भूमि को उपजाऊ बना दिया है। गांव की यह भूमि पांच वर्ष पूर्व बंजर पड़ी हुई थी, जिसे उपजाऊ बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक करोड़ की लागत से श्रृंखलाबद्ध चेकडैम का निर्माण कार्य करवाया गया। जिससे किसानों को उम्मीद जगी, परंतु यह बेकार साबित हुआ और बंजर भूमि तक पानी नहीं पहुंच सकी। जिसके बाद किसानों ने खुद से ही मेहनत करके पानी को खेतों तक पहुंचाया। किसानों ने हपतनाला से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए चार से पांच फीट तक की खुदाई कर दो किमी तक का नाला दो माह के अथक प्रयास के बाद तैयार किया। जिससे बंजर भूमि तक पानी पहुंचने लगी और किसानों ने एकजुट होकर अपने अपने खेतों में जमकर मेहनत किया। जिससे गांव के दो सौ एकड़ बंजर भूमि सोना उगलने लगी है और सालाें भर किसान खेती कर रहे है। आज किसानों द्वारा नाला निर्माण कार्य किए पांच वर्ष बीत चुका है, परंतु अब भी नाले के पानी से सालों भर किसान खेती कर रहे है और चटाक गांव सहित आसपास के गांव वाले भी नाले का दायरा बढ़ाकर अपने खेतों तक पानी ले जाकर सालो भर खेती कर रहे है।
हरखेत में बगैर बिजली के पहुंचता है पानी : किसानोंद्वारा तैयार किया गया नाला का पानी बगैर बिजली के टुलूपंप के सहारे हर खेत में पहुंचता है। किसान गुलाब महतो बताते है नाला निर्माण इतनी अच्छे तरीके से किया गया है कि पानी की धार काफी तेज रहती है। मुख्य नाले से छोटे छोटे नाला बनाकर हर खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। जिससे बगैर बिजली और पंप के सहारे 24 घंटे खेतों में पानी पहुंचता है।
लाखोंकी हो रही है खेती, एक फैसले ने बदली तकदीर : चटाकगांव के किसान सीमांत महतो, मिथलेश महतो, मुंशी दीवान कहते है कि पांच वर्ष पूर्व लिए गए एक फैसले ने हमारी किस्मत ही बदल दी है। हमारे बंजर भूमि अब सोना उपजाने लगी है, सालों भर खेती कर लाखों रुपए की आमदनी हो रही है और भुखमरी की स्थिति से उबर कर अच्छी आमदनी कर रहे है।