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कोयला उद्योग को गैर-राष्ट्रीयकृत करने का प्रयास प्रदीप
केंद्रसरकार ने 10 दिसंबर को कोल माइंस स्पेशल प्रोविजन्स आर्डिनेंस संसद में लाकर कोयला उद्योग को गैर-राष्ट्रीयकृत करने का घिनौना प्रयास किया है। उक्त बातें अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री प्रदीप दत्त ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कही है। दिए गए प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि एक ओर माननीय उच्चतम न्यायालय ने 218 कोल ब्लाकों के आवंटन को गड़बड़ी बता आवंटन रद्द कर दिया है। वहीं दूसरी ओर सरकार ने अपनी चालाकी दिखाते हुए कोयला उद्योग को गैर राष्ट्रीयकृत करने के साथ निजी और विदेशी कंपनियों को बाजार में कोयला बेचने का छूट देने के लिए कोयला अध्यादेश संसद में लाया है। इस अध्यादेश में कई क्लाॅज ऐसे हैं जो मजदूरों के हित में नहीं हैं। अध्यादेश पास हो जाने से मजदूरों का शोषण शुरू हो जाएगा। नागरिकों को संवैधानिक अधिकार से वंचित कर दिया गया है। नागरिक सरकार से बीना अनुमति लिए न्यायालय भी नहीं जा सकते है। साथ ही जो भी कंपनी भारत में रजिस्टर्ड होगी वह कोयला खनन कर सकती है। इन क्लाॅजों से विदेशीकरन को बढ़ावा मिल जाएगा। राष्ट्रीयकरण एक्ट 1973 में भी संशोधन की जा रही है। जिससे निजी कंपनियों को बाजार में कोयला बेचने का पूर्णतः अधिकार मिल जाएगा। जो निजीकरण को बढ़ावा देगा।
अतः भारतीय मजदूर संघ उपरोक्त कोयला अध्यादेश का विरोध करता है। संघ ने काला बिल्ला लगाकर मजदूरों को जागरूक करते हुए इसका विरोध करना प्रारंभ कर दिया है और आगे भी लंबी लड़ाई उग्र आंदोलन की तैयारी चल रही है। तमाम कोयला मजदूरों और यूनियन नेताओं से अपील है कि मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भागीदारी सुनिश्चित करें।