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नप की पेय जलापूर्ति का अर्थ है आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया
{ व्यवस्था दुरुस्त करने में सांसद विधायक की भी जिम्मेवारी : अध्यक्ष
अभयवर्मा|गिरिडीह
नपकी पेयजलापूर्ति व्यवस्था के संदर्भ में आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया वाली कहावत ठीक जमती है। विगत एक साल से पेयजलापूर्ति व्यवस्था ठीक करने के नाम पर नप की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई है। उधार से चल रही शहर की पेयजलापूर्ति व्यवस्था कभी भी ठप हो सकती हे।
पेयजलापूर्ति के नाम पर वसूली जा रही रकम देने में सक्षम लोगांे को कोई परेशानी नही हो रही है पर गरीबों के लिए यह परेशानी का शबब बन गई है। इस दिशा में नगर पर्षद अध्यक्ष दिनेश यादव भी गंभीर है। उन्होंने आमलोगो को राहत देने के लिए नगर विकास विभाग से पानी को कर मुक्त करने की मांग की है। कहा कि जब तक सरकार व्यवस्था नही करती तब तक नि:शुल्क व्यवस्था की जाए। पेयजलापूर्ति से हो रही आमदनी से भविष्य में नप के लिए यह सेवा देना नामुमकिन हो जाएगा। नप अध्यक्ष दिनेश यादव ने बताया कि शहरी क्षेत्र में आपूर्ति पर माह में 35 लाख का खर्च रहा है और टैक्स वसूली में मात्र तीन लाख की राशि रही है। उन्होंने बताया कि पेयजलापूर्ति में केवल बिजली मद में प्रति माह चौदह लाख खर्च पड़ रहा है। इसके अलावा 9.50 लाख मेंन्टेनेन्स खर्च है। उन्होंने बताया कि व्यवस्था दुरूस्त करने के लिए 120 कमचारी लगाए गए है।
नगर परिषद का कार्याल।
पीएचईडी को मिलती थी सालाना 5.50 करोड़
नपअध्यक्ष दिनेश यादव ने बताया कि बोर्ड गठन से पूर्व शहर की पेयजलापूर्ति की जिम्मेवारी पीएचईडी के जिम्मे थी। इसके लिए पीएचईडी को सालाना सरकार की ओर से 5.5 करोड़ का भुगतान किया जाता था। 1 अप्रैल 2014 से शहर की पेयजलापूर्ति व्यवस्था की जिम्मेवारी सरकार की ओर से नगर पर्षद के जिम्मे डाल दी गई। सरकार के पल्ला झाड़ लेने के बाद यूजर्स चार्ज से पैसा वसूल कर व्यवस्था दुरूस्त करने की जिम्मेवारी नप पर सौंप दी गई। पर पेयजलापूर्ति मेें आने वाली खर्च वहन करना अब नप के वश में नही रहा है।
सांसदऔर विधायक भी करें पहल
श्रीयादव ने कहा कि जनता के प्रति केवल नप अध्यक्ष की जिम्मेवारी नही बनती है। कहा कि इस दिशा में सांसद विधायक की भी शहर के प्रति जिम्मेवारी है। उन्होंने सांसद विधायक मद से इसे संचालित करने की मांग की है। कहा कि जब तक इसकी वैकल्पिक व्यवस्था नही हो जाती है तब तक सरकार को इसे नि:शुल्क कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में यह व्यवस्था नि:शुल्क थी।
चारबार भेजा गया त्राहिमाम संदेश
नपअध्यक्ष दकनेश यादव ने बताया कि मामले में नगर विकास विभाग को चार बार त्राहिमाम संदेश भेजा जा चुका है। पर इस दिशा में अब तक कोई पहल नही की गई है। उन्होंने कहा कि बकाया राशि के कारण ठेकेदार भी व्यवस्था से हाथ खड़ा करने का अल्टीमेटम दे चुका है। कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से कोई पहल नही की गई तो शहर में पानी के लिए हाहाकार मचना तय है।