वेलेंटाइन डे
दो हजार में बिक रही राधा-कृष्ण की मूर्ति
हुड़दंगियों से निबटने के लिए पुलिस तैयार
आज प्रेमी जोड़े करेंगे हाल-ए-दिल का इजहार, गुलाब से सजीं शहर की फूल दुकानें
नएजमाने की इस नई सोच को बाजार ने हवा दी है। 14 फरवरी को हाल-ए-दिल का इजहार करने के लिए बाजार सज-धज कर तैयार है। मोबाइल, व्हाट्सएप और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया के बावजूद आज भी वेलेंटाइन डे कार्ड की अहमियत बरकरार है। इसको लेकर बाजार में 50 रुपए से लेकर एक हजार तक के कार्ड मौजुद हैं। वहीं राधा-कृष्ण की मूर्ति और दिलनुमा आकृति के दो सौ रुपए से से 2 हजार तक के आइटम मौजुद हैं। इस दिन की तैयारी में लड़कियां जब गिफ्ट खरीदती हैं तो उसमें परफ्यूम भी शामिल होता है। जबकि लड़के खरीदारी करते हैं तो उसमें चाकलेट विशेष रुप से शामिल होता है। वेलेंटाइन डे के दिन लाल गुलाब की विशेष मांग रहती है। इसकी दो किस्में बाजार में उपलब्ध हैं। वेलेंटाइन डे को देखते हुए विशेष कर बेंगलुरू लाल गुलाब बाजार में उपलब्ध है। वेलेंटाइन डे पर शहर में लाल एवं पीले गुलाब 10 से एक सौ रुपए तक बिक रहें हैं। इस दिन गिरिडीह में शहर में गिफ्ट आइटम, फूलों, आभूषण सहित अन्य चीजों के 10 लाख रुपए के व्यापार का अनुमान है।
ई-रिलेशनशिप की जमीं पर रिश्ते की डोर
आजफेसबुक, व्हाट्सएप एवं मोबाइल की जमीन पर ई- प्यार की फसल खूब लहलहा रही है लेकिन समस्या यह है। आज के इस प्यार में भावना और एहसास के लिए कोई जगह नहीं है। इसमें धोखाधड़ी आम है। दुखद यह है कि ऐसे अधिकांश रिश्तों की बुनियाद अविश्वास की जमीं पर खड़ी रहती है। तमाम विरोध एवं बंदिशों के बवजूद गुपचुप तरीके से ही सही लेकिन इस छोटे से शहर में भी संत वेलेंटाइन के आराधकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
गोदानउपन्यास में है प्रेमचंद की प्रेम अभिव्यक्ति
प्रेमचंदने “गोदान” में प्रेम को अभिव्यक्त करते हुए लिखा है कि “प्रेम क्या भय से बांध कर रखा जा सकता है। वह तो पूरा विश्वास चाहता है, पूरी स्वाधीनता चाहता है, पूरी जिम्मेदारी चाहता है।” जबकि आज का तथाकथित प्यार इसके ठीक उलट जिम्मेदारी और विश्वास से दूर केवल स्वाधीनता चाहता है। “चट प्यार - पट अलगाव अब आम बात है और रोज नए परिधान की तरह प्यार बदलना आज की माडर्न पीढ़ी के लिए फैशन बन चुका है। उपन्यासकार राजेंद्र यादव ने अपने उपन्यास “मंत्रविद्ध” लिखा है कि “क्या प्यार जैसी कोई चीज होती है, जिसमें आदमी अपना भविष्य, जीवन, सुरक्षा सब तुच्छ समझने लगता है। साहित्य के संस्कार जरुर ऐसे हैं लेकिन जिंदगी में प्यार सम्मानजनक समझौते का नाम है।
गिरिडीह | वेलेंटाइनडे पश्चिमी सभ्यता संस्कृति को बढ़ावा देता है। यह भारत की संस्कृति नहीं है। यह बातें धर्म संस्कृति रक्षा मंच की ओर से कही गई। मंच के संतोष सिंह ने युवक-युवतियों से वेलेंटाइन डे का विरोध करने का आग्रह किया। कहा कि आधुनिकता का लबादा ओढ़े युवा वेलेंटाइन का इजहार करने के लिए रविवार को व्यस्त होंगे। धर्म संस्कृति रक्षा मंच की नजरें भी उनकी गतिविधियों पर होगी। विरोध की चेतावनी के मद्देनजर पुलिस ने अश्लीलता और फूहड़पन पर लगाम के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी है। अनुमान है कि हर साल की तरह इस साल भी खंडौली, वाटर फाॅल, क्रिश्चियन हिल कुछ मंदिरों में प्रेमियों का जमावाड़ा होगा।