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किसानों के धान से बिचौलियों को लाभ

5 वर्ष पहले
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भाकपामाले ने झारखंड की रघुवर सरकार को पूरी तरह से किसान विरोधी बताते हुए धान खरीद के नाम पर आम किसानों की आड़ में बड़े व्यापारियों, जमाखाेरों और राइस मिल मालिकों को सीधा फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। इस बाबत माले के राज्य कमिटी सदस्य राजेश यादव ने कहा कि जिस समय किसानों के पास धान बेचने की मजबूरी थी, उस समय सरकार ने इसपर सुस्ती दिखायी। जब किसान अपनी धान बिचौलियों के हाथों कम कीमत पर बेच चुके हैं तो वे बड़े व्यापारियों, जमाखारों या फिर राइस मिलों में पहुंच चुके धान को खरीदने के लिए सरकारी कवायद की जा रही है। अब सरकारी दर पर धान खरीदी का लाभ आम किसानों के बजाय सीधे धान का स्टाॅक रखने वालों को मिलने वाला है। सरकारी दर पर जहां धान की कीमत 1410 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित की गयी है, वहीं किसानों को इसे 800 से लेकर 1000 रू0 तक में ही मजबूरीवश बेचना पड़ा। श्री यादव ने कहा कि अभी गिरिडीह जिले में शेष बचे वित्तीय वर्ष के भीतर ही डेढ़ लाख टन से भी अधिक धान खरीदने की बात हो रही है। 31 मार्च के पूर्व इस लक्ष्य को किस तरीके से हासिल किया जाएगा और इसका फायदा किसे मिलेगा यह अच्छी तरह से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व भी धान खरीदी के नाम पर गोरखधंधा इस जिले में हो चुका है। जिसका जोरदार तरीके से माले ने विरोध किया था। लेकिन तत्कालीन समय में भी इसे रफा-दफा कर दिया गया था। प्रशासन से इस मामले में नजर रखने की मांग की है। यह भी कहा है कि उनकी पार्टी आम जनता तथा किसानों के बीच इस मामले का भंडाफोड़ अभियान चलाएगी। जनविरोधी सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया जाएगा।

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