चढ़ता गया दिन और लंबी होती गई कतार
मनोज कुमार पिंटू|देवेश बक्सी गिरिडीह/पीरटांड
भगवानपार्श्व नाथ की पवित्र भूमि मधुबन और पीरटांड के वोटरों ने रविवार को चौथे चरण के मतदान में खुलकर हिस्सा लिया। हिंसामुक्त चुनाव में हिस्सा लेकर जहां अहिंसा परमो धर्म का संदेश प्रचारित करने में जिला प्रशासन सफल रहे। वहीं पीरटांड की खुली वादियां बेखौफ मतदान का प्रत्यक्ष गवाह बना। हालांकि इस बेखौफ मतदान का पूरा श्रेय गिरिडीह जिला पुलिस के वरीय अधिकारियों और बाहर से आए विभिन्न सुरक्षा बल के जवानों को जाता है। पीरटांड के बूथों में मतदान समयानुसार सुबह सात बजे से शुरु हो गया था। मौसम की दगाबाजी के कारण मतदान का शुरुआती समय तो काफी पिछड़ा रहा। बावजूद जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वैसे वैसे मतदान में इजाफा होना शुरु हुआ। बेखौफ चल रहे मतदान के दौरान पीरटांड के बूथों का जायजा लेने के क्रम में यह स्पष्ट नजर आया कि हर बूथ में पारा मिलिट्री के जवान अपने हथियार के साथ बूथों की सुरक्षा में मुस्तैद दिखे। प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का वोट बहिष्कार का नारा भी धरा का धरा रह गया। पूरे पीरटांड के बूथों का जायजा लेने के क्रम में नक्सलियों का वाेट बहिष्कार का बैनर पांडेयडीह के जंगल के एक झोपड़ी में नजर तो आया। लेकिन पूरे उत्साह के साथ चल रहे मतदान के बीच नक्सलियों का यह बैनर अपने आप में मुंह चिढ़ाता दिखा। कुल मिलाकर यह कहा जाए कि वोट बहिष्कार के नारे देने वाले नक्सलियों के चक्रव्यूह को तोड़ने में गिरिडीह पुलिस सफल रही। पुलिस विभाग इसे बड़ी सफलता मान रहा है।
पूरी उत्साह से ग्रामीणों ने किया मतदान
ठंडभरे मौसम के बीच पीरटांड के बूथों में क्या ग्रामीण, क्या ग्रामीण महिलाएं और यूथ वोटर लगभग सभी पूरे उत्साह के साथ लोकतंत्र के महापर्व में शामिल हुए। वहीं पीरटांड के ग्रामीण क्षेत्रों की वयोवृद्ध महिलाएं भी लाठियों के सहारे मतदान केन्द्रों की तरफ जाती नजर आई। पीरटांड के दौरे के दौरान सड़क से लेकर गिरिडीह-डुमरी रोड़ के कई छोटे-बड़े पर्वत भी पारा मिलिट्री के जवानों की कस्टडी में रहा। जबकि क्षेत्र के अधिकांश अतिसंवेदनशील बूथ पारा मिलिट्री जवानों के घेरे में रहा। संवेदनशील बूथ भी काफी हद तक सुरक्षा बल के जवानों की निगरानी में ही रहे। इस कारण तो नक्सलियों को हाथ-पांव मारने का मौका मिला और ही वोट के सौदागर अपने प्रत्याशी के लिए कोई खुराफात कर पाएं। पीरट