पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अब तक नप अध्यक्ष नहीं बने हैं विधायक

अब तक नप अध्यक्ष नहीं बने हैं विधायक

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
1980 में बनी थी संभावना

नगरपर्षद के लंबे इतिहास में किसी अध्यक्ष उपाध्यक्ष को विधायक बनने का मौका नहीं मिला है। यहां सबसे मजेदार बात यह है कि वार्ड पार्षद रह चुके ओमीलाल आजाद को गिरिडीह के विधायक बनने में कामयाबी मिली है पर अध्यक्ष उपाध्यक्ष रहते कई ने भाग्य आजमाया पर उन्हें विस चुनावी समर में विजयी होने का सौभाग्य नहीं मिला। यहां सवाल है कि क्या वर्तमान अध्यक्ष दिनेश यादव इस मिथक को तोड़ पाएंगें। फिलहाल श्री यादव चुनावी तैयारी में जुटे है। इनका क्या होगा यह भविष्य ही बताएगा पर चुनावी तैयारी में श्री यादव कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहे है। अब तक के रिकार्ड को धाराशायी करना इनके लिए बड़ी चुनौती होगी। हालांकि नगरपालिका का इतिहास बहुत पुराना है। 1902 में जब नगरपालिका की स्थापना हुई थी तब देश में अंग्रेजों का शासन था। जब अखंड बिहार में पहली विधानसभा चुनाव हुई तो नप की उम्र पचास साल के करीब हो चुकी थी। कहा जा सकता है कि 62 साल की उम्र तक नप की कोख से जन्म लिए एक भी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को विधायक बनने का मौका नहीं मिला। हां यह जरूर हुआ कि वार्ड पार्षद विधायक बनने में कामयाब रहे है। यहां काबिलेगौर है कि अध्यक्ष के विस चुनाव में उतरने का सिलसिला 1980 से शुरू हुआ है। इससे पूर्व किसी नप अध्यक्ष ने विस चुनाव में अपना भाग्य नहीं आजमाया था।

वार्ड पार्षद से बने विधायक | भलेनप अध्यक्ष को यह सौभाग्य नहीं मिला हो पर वार्ड पार्षद को यह सौभाग्य यहां मिल चुका है। 1985 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से ओमीलाल आजाद गिरिडीह के विधायक बनने में कामयाब रहे। यह कम मजेदार नहीं है कि वार्ड पार्षद चुनाव में हारकर भी विस चुनाव में जीत हासिल की गई है। ऐसे भाग्यशाली नेता भाजपा के चन्द्रमोहन प्रसाद रहे है।

1980 के विधानसभा चुनाव में पक्की संभावना बनी थी कि नगरपालिका अध्यक्ष रहते रणधीर प्रसाद विधानसभा की दहलीज पार कर लेंगे। चुनाव प्रचार उफान पर था कि इसी दौरान रणधीर प्रसाद की आकस्मिक मौत हो गई। उनकी मौत हादसा थी या हत्या इसकी सच्चाई आज तक उजागर नहीं हो पाई। प्रसाद की मौत के बाद उनकी धर्मप|ी उर्मिला देवी को कांग्रेस का टिकट मिला।