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बरमसिया में तीन स्थानों पर दुर्गा पूजा

7 वर्ष पहले
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अंजनी कुमार सिन्हा | गिरिडीह

शहरके बरमसिया स्थित तीन स्थानों पर दुर्गापूजा को लेकर स्थानीय लोगों के साथ शहरवासियों को भी इस पूजा का इंतजार रहता है। जिसमें मुख्य रूप से रक्षित हाउस, विजय इंस्टीच्यूट्स और नवयुवक संघ की पूजा को लेकर तैयारी जोरों पर है। 1950 में विजय इंस्टीच्यूट्स में शुरू हुए इस पूजा को आज 65 वर्ष हो गए पर पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में भक्ति आज भी वैसे ही है। वहीं 1951 मेंं रक्षित हाउस से शुरू हुए पूजा की भव्यता पूरे शहर में विख्यात है। स्व अमोल रक्षित की ओर से शुरू की गई इस पूजा को आज भी उनके पुत्र उतनी ही श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते रहे हैं। यहां की मूर्ति की भव्यता और सुंदरता को देखे बिना लोग नहीं रह पाते हैं। यहां की पूजा में लोग बढ़चढ़कर भाग लेते हैं। वहीं नवयुवक संघ दुर्गापूजा समिति का अपना अलग इतिहास रहा है। वर्तमान स्थान में होने वाले इस पूजा स्थल के पूर्व यहां गली स्थित पुरानी मंदिर में प्रतिमा की पूजा की जाती थी।

आयोजकों को होती है परेशानी

नवयुवक संघ पूजा समिति ने जहां दिनों दिन एक छोटी सी मंडप से शुरू कर आज वृहद मंदिर का सफर तय किया है। वहीं यहां की पूजा विधि भी विख्यात है। यहां के पुजारी पंडित महेन्द्र पांडेय के सानिध्य में होने वाले इस पूजा की महत्ता भी विशेष है। नवरात्र पूजा के उपरांत महानवमी को यहां विशेष हवन किया जाता है। जिसमें शहर के कई स्थानों के लोग शामिल होते हैं। यहां की पूजा को लेकर अध्यक्ष अजय कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष पूजा खर्च में बढ़ोतरी होने की संभावना है। पूजा का बजट करीब डेढ़ लाख रुपये की है। वहीं विजय इंस्टीच्यूट्स में भी पूजा की तैयारी जोरों पर है। यहां षष्ठी तिथि से मूर्ति स्थापना के साथ पूजा शुरू की जाती है। हाल के वर्षों में यहां के सदस्यों ने अपनी सहयोग से पूजा स्थल और परिसर काे सुंदर बनाया है। इस बारे में राजेन्द्र त्रिपाठी ने कहा की इस बार भी पूजा की भव्यता कायम रहेगी।

पूजा को लेकर वैसे पूरे नवरात्र तक यहां भक्तिमय वातावरण रहता है। साथ ही रक्षित हाउस की पूजा विशेष मानी जाती है। यहां महाअष्टमी को विशेष पूजा की जाती है। जिसमें शहरभर के लोग पुष्पांजलि देते हैं। साथ ही दीप उत्सव मनाया जाता है। यह परंपरा शुरू से चली रही है। बताया जाता है कि महाअष्टमी की पूजा श्रद्धालुओं यहां भक्ति भा