बेहाल सदर अस्पताल
नर्सों के भरोसे होती है अस्पताल में डिलिवरी
कुव्यवस्थाओं में शुमार सरकारी अस्पताल की स्थिति फिर बदतर, धनबाद, बोकारो और रांची जाते हैं मरीज
{ काउंटर में दवा की सूची 23 लेकिन मरीजों को मिलती है सिर्फ 4 दवाइयां
प्रवीणराय|गिरिडीह
कुव्यवस्थाओंके मामले में हमेशा सुर्खियों में रहा गिरिडीह सदर अस्पताल की स्थिति एक बार फिर बदतर हो गई है। यहां महिलाओं के डिलेवरी की जिम्मेवारी नर्सों पर है। वह भी महिला चिकित्सकों की गैरमौजूदगी में। ऐसे में सदर अस्पताल पहुंचे गर्भवती महिलाओं की जान खतरे में होती है। जबकि महिला चिकत्सक का आगमन सिर्फ सिजेरियन के वक्त होता है। वैसे गिरिडीह सदर अस्पताल में 90 फीसदी मरीज डिलिवरी अथवा परिवार नियोजन से ही जुड़े भर्ती होते हैं। िजसमें शत-प्रतिशत गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने वाले हैं। अन्य बीमारियों के इलाज के लिए तो सदर अस्पताल में डॉक्टर है और ही इलाज की व्यवस्था। दुर्घटना में जख्मी अथवा बर्निंग मरीज गलती से अस्पताल पहुंच गया तो चंद मिनट में उसका रेफर होना तय है। मामूली जख्मी वालों को भी गंभीर बताकर रेफर किया जाना सदर अस्पताल की पुरानी आदत रही है। लिहाजा परिजन आनन-फानन में मरीज को धनबाद, रांची अथवा बोकारो ले भागते हैं। ऐसे में रेफर स्थल ले जाने के दौरान बीच रास्ते में ही कई घायलों की मौत हो जाती है। पता चलता है कि जख्मी मरीज की यदि फौरन इलाज शुरू हो गई होती तो उसकी जान बचाई भी जा सकती थी।
सदर अस्पताल में इलाज के लिए आईं महिलाएं।
बेकार हुई बर्निंग यूनिट
गिरिडीहसदर अस्पताल में लगा बर्निंग यूनिट रखरखाव के अभाव में बेकार हो गया। सरकार सदर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाह स्थिति को देखते हुए तत्कालीन विधायक मुन्नालाल ने विधायक कोटे से लाखों की लागत पर सदर अस्पताल को बर्निंग यूनिट मुहैया कराई थी।
जीर्ण-शीर्ण अवस्था में मरीजों का बेड
कूड़े-कचड़ेगंदगी के बीच सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे है। 206 मरीजों के भर्ती की क्षमता वाले सदर अस्पताल में मरीजों को तो सही से दवा मिलती है आैर ही बेहतर इलाज की व्यवस्था है। मरीजों के लिए अस्पताल के वार्डों में जो बेड है वह भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। जिसे ढंकने के लिए अस्पताल प्रबंधन के पास एक चादर भी नहीं है।
व्यवस्था के अनुसार दी जा रही सुविधा : उपाधीक्षक
^सदरअस्पताल के उपाधीक्षक डॉ एसबी चौधरी हैं। लेकिन तीन दिनों की छुट्टी पर होने के कारण प्रभार मुझे मिला है। फिलहाल सदर अस्पताल में डॉक्टरों की स्वीकृत पद 21 है। जिसमें दो महिला चिकित्सक सहित 13 डॉक्टर पदस्थापित हैं। मरीजों को 24 घंटे की सेवा दी जा रही है। जहंा तक साफ-सफाई की बात है तो व्यवस्था के अनुसार वह भी नियमित चलता है। जेनरेटर भी समय पर चलता है। दवा का कुछ अभाव जो चुका है।\\\'\\\' डॉएपीएन देव, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल गिरिडीह