अनुबंध समाप्ति के आदेश से हड़कंप
गिरिडीह सदर अस्पताल की फाइल फोटो।
अशोक शर्मा|गिरिडीह
जिलेमें अनुबंध पर कार्यरत एमपीडब्लू(एम) के अनुबंध समाप्त होने संबंधी राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी के पत्र से अनुबंधकर्मियों को बेरोजगारी की चिंता सताने लगी है। एमपीडब्ल्यू अनुबंधकर्मी विगत 2008 से ही जिले में अपनी सेवा देते रहे हैं। समय समय पर टीकाकरण अन्य आवश्यक सेवाओं में भी इनकी डयूटी विभाग द्वारा ली जाती रही है। दर्जनों की तादात में कार्यरत एमपीडब्लू पूरे मनोयाेग से विभिन्न प्रखंडों में कार्य कर रहे हैं। लेकिन राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (भीवीडी) डाॅ पुष्पा मारिया के पत्रांक 580 दिनांक 06-08-2014 प्रसंग भारत सरकार का पत्र 5-80/2012/ एनवीबीडीसीपी/आई और ई/कंट्रेक्चुअल एमपीडब्ल्यू दिनांक 01-08-14 के आलोक में असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी झारखंड के सभी जिले को पत्र प्रेषित कर राज्य के वैक्टर जनित रोग निंयत्रण कार्यक्रम के तहत कार्यरत एमपीडब्लू की अनुबंध सेवा अवधि 30 सितंबर 2014 तक ही बताई गई है। विभाग के इस पत्र से पांच वर्षो से जिले में कार्यरत एमपीडब्लू कर्मियों में मायूसी छा गई है। इस दिशा में पहल करने को लेकर कर्मियों ने राज्य के सीएम हेमंत सोरेन को एक पत्र भी प्रेषित कर इसकी जानकारी दी है। कहा है कि एनआरएचएम अनुबंध कर्मचारी संघ झारखंड के प्रतिनिधियों की वार्ता झारखंड सरकार के प्रधान सचिव बी के त्रिपाठी, आशीष सेहमार, अभियान निदेशक, शुभ्रा वर्मा संयुक्त सचिव, सुमंत मिश्रा निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं के साथ पूर्व में हो चुकी है। संघ की मांगों के अनुरूप एमपीडब्लू का समायोजन मलेरिया विभाग के रिक्त पदों पर कर संबंधित संलेख तैयार कर मंत्री परिषद में भेजने हेतु मंत्री महोदय के समक्ष उपस्थित करा दिया गया है। जिसकी फाईल कार्मिक विभाग में लंबित पडा है। आवेदन में सीएम से अनुरोध किया है कि एमपीडब्लू की लगातार सेवा एवं उम्र को देखते हुए एमपीडब्लू का समायोजन रिक्त पदों पर करते हुए सेवा नियमित करने का अनुरोध किया है। फिलहाल जो भी हो विभाग के इस पत्र ने वर्षो से कार्यरत एमपीडब्लू (एम) के चेहरे पर सिकन तो जरूर ला दिया है।
जिलेमें दे रहे हैं बेहतर सेवा
गिरिडीहजिले के विभिन्न प्रखंडों मे इन दिनों डेगू रोिगयों की संख्या रोज रोज बढ रही है। इस स्थिति में रोगियों की पहचान कर उसे सही मार्गदर्शन समय पर अस्प