मां सरस्वती की प्रतिमाएं विसर्जित
विद्याकी अद्यिष्ठात्री मां सरस्वती की पूजा के दूसरे दिन रविवार को माता की प्रतिमा का विसर्जन पूरे धूमधाम के साथ किया गया। स्कूल-कॉलेज, शिक्षण संस्थानों के अलावा पूजा समितियों द्वारा पंडालों में स्थापित माता की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान दूसरे दिन पुजारियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने पहले हवन पूजा-अर्चना कर मां को भोग लगाया। श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया। प्रसाद वितरण के बाद दौर शुरू हुआ प्रतिमा विसर्जन का। मौके पर श्रद्धालु गानों की धुन पर माता की प्रतिमा विसर्जन के लिए ले जाते नजर आए। इस दौरान स्कूल-कॉलेज की प्रतिमा काे लेकर छात्राअाें की टोली अबीर-गुलाल उड़ाते हुए उत्साह के साथ निकली। विसर्जन को लेकर सबसे अधिक उत्साह छात्राओं में नजर आया। छात्राएं एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हुए पूजा की शुभकामना दे रही थी। वहीं पूजा समितियों के श्रद्धालु भी अबीर-गुलाल उड़ाते हुए जयकारा लगाते हुए विसर्जन के लिए निकले। माता के प्रति अटूट अास्था भरे श्रद्धालुओं की भीड़ उत्साह के साथ विसर्जन के लिए जाते दिखे। हालांकि पूजा का दूसरा दिन रहने के कारण सिर्फ शिक्षण संस्थानों और कुछ समितियों द्वारा प्रतिमा विसर्जन किया गया था। वहीं शहर की अधिकांश मूर्तियों का विसर्जन सोमवार होना है। इधर मां शारदे की मूर्ति लेकर वाहनों में निकले श्रद्धालु मां का जयकारा लगाते और अबीर-गुलाल उड़ाते हुए चल रहे थे। प्रतिमा विसर्जन के मौके पर अश्लील गानों की झड़ी के बीच थिरकते युवाओं की टोली सहज यह दर्शाती नजर आई कि विद्या की अद्यिष्ठात्री मां सरस्वती की उपासना भी अब पूरी तरह से पाश्चात्य संस्कृति के शिकंजे में चुकी है। वहीं कुछ पूजा समितियों और धार्मिक भजनों की धुन पर मां शारदे को नम आंखों से भी विदाई दी। इधर प्रतिमा लेकर श्रद्धालु शहर के तालाब और नदी पहुंचे, और जलस्रोतों में माता की प्रतिमा का विसर्जन किया।
पूजन स्थल से माता की प्रतिमा लेकर निकलते श्रद्धालु।
एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते श्रद्धालु।