सड़क हादसे के बाद खुली प्रशासन की पोल
रविवारकी शाम बगोदर में हुई भीषण सड़क हादसे ने जिला प्रशासन के दावों की पाेल खोल कर रख दी है। पूजा के ठीक पहले प्रशासनिक पदाधिकारियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के दावे किए थे। मूर्ति विसर्जन के दाैरान हुए इस हादसे के बाद लोगाें की सुरक्षा को लेकर किए तमाम दावे खोखले साबित हुए। इस दौरान पुलिस ने सतर्कता बरती और ही एनएच किनारे बसे रिहायशी इलाकों में नाकेबंदी की जरूरत समझी। इस दौरान अगर पुलिस एवं प्रशासन सतर्क रहती तो ऐसे भीषण हादसे को समय रहते टाला जा सकता था। पुलिस को भी कहां इल्म थी कि उसकी लापरवाही कई जिंदगियां लील जाएगी लेकिन होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था।
ऐसाही होता है अक्सर
अक्सरऐसा ही होता है जब तक कोई बड़ी घटना हो तब तक प्रशासनिक नींद नहीं खुलती है। घटनाओं के बाद शुरू होता है कि फिर ऐसी घटना की पुनरावृत्ति हो। इसकी कवायद और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होती है। लेकिन ऐसे मामलों में होता कुछ नहीं, समय के साथ ऐसी घटनाओं को विभाग भी भूल जाती है और रोकथाम के लिए बनाए गए सारे उपाय हवा हो जाते हैं। आमलोग भी इसे भूल कर रोजमर्रा के कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं। लेकिन ऐसी हर घटनाएं छोड़ जाती हैं अपने पीछे कई सवाल।