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विधानसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही शुरू हुआ धरना-प्रदर्शन
विधानसभाचुनाव की दस्तक के साथ ही राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। जनता का विश्वास हासिल करने के लिए जनमुद्दे पर एेन वक्त पर आंदोलन की बात कर रहे हैं। चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा गर्म होने लगा है। साथ ही राजनीतिक विसात बिछाई जाने लगी है। आंदोलन करने वाले जनप्रतिनिधि आंदोलन के जरिए कहीं कहीं अपनी ही पार्टी पर दबाब बनाने में जुटे हैं। राजनीतिक हलकों में इससे कई कायस लगाए जाने लगे हैं। साथ ही जनमुद्दों के प्रति एक बार फिर जनता के लिए दर्द जागा है और शहरी क्षेत्र की समस्याओं को आधार बनाया जा रहा है।
बिजली को लेकर भी हो रहे हैं आंदाेलन
िजलेमें बिजली समस्या नासुर बन गई है। विपक्षी दलों के साथ साथ सरकार में शामिल दल और खासकर उसी दल के नेता का बिजली के आंदोलन करना भी जनता समझ नहीं पा रही है। पिछले दिनों धनवार में कांग्रेस जिलाध्यक्ष समेत कई नेता ने अपने ही मंत्री के खिलाफ ढिबरी जुलुस निकाला था।
शहर की दुर्दशा का जिम्मेवार कौन
शहरमें आज बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, सफाई की समस्या को लेकर जनता परेशान है। शहर में सडक चलने लायक नहीं है। सफाई व्यवस्था सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। गंदगी का अंंबार लगा है। बिजली रानी तो मेहमान के रूप में आती है। इन समस्याओं को लेकर नेताओं को चुनाव के पूर्व प्रमुख मुद्दा मिल गया है। इन सभी मुददाें को लेकर स्थानीय सांसद, निवर्तमान विधायक समेत भाजपाई नेता आगामी 19 सिंतबंर को धरना देने की बात कही है। जनता यह जानना चाहती है कि शहर की दुर्दशा के लिए जिम्मेवार कौन है। िनवर्तमान विधायक भी शहर की समस्या समाधान नहीं कर सके। उनके समय में बनी नली, गली पुन: उसी दशा में गई है। लगातार दो बार से गिरिडीह से पांच बार के सांसद चुने गए और लगातार दूसरी बार सांसद बनने पर भी शहरी क्षेत्र की समस्याओं के प्रति कितने गंभीर रहे जगजाहिर है। साथ ही पूर्व के नप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सह कार्यकारी अध्यक्ष भी उसी दल से रहे हैं। शहर की दशा एक दो दिन में ऐसी नहीं हुई है यह वर्षों से शहरवासियों की सुविधा की उपेक्षा की जा रही है। ऐसे में इन नेताओं का शहर के समस्याओं के प्रति आंदोलन करना राजनीतिक दर्शाता है। वहीं सांसद द्वारा बीएसएनएल के खिलाफ भी अपने आंदोलन में शामिल करना जबकि यह मामला केन्द्र सरकार से जुडा हुआ है।
चुनाव आते ही शुरू हो जाती है राजनीति
चुनावके समय सांसद विधायक