जो आवे सो भर-भर पावे, खाली...
जोआवे सो भर भर पावे, खाली हाथ कोई जावे… कबीर का दोहा सिरसिया स्थित कबीर ज्ञान मंदिर में चरितार्थ हो रही है। यहां चल रहे दो दिवसीय सतगुरु विवेक साहब निर्वाण दिवस में देश भर के हजारों श्रद्धालु पहुंचे। इस महोत्सव को लेकर गुरु गोविंद धाम में गुरुवार सुबह सतगुरु विवेक साहब की समाधि पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे और पूजा की। यह स्थान जो सगुन और निर्गुण का संगम स्थली गुरु गोविंद धाम के नाम से जाना जाता है। जहां भगवान विष्णु और सदगुरु कबीर की प्रतिमा विराजमान है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जो कोई दिल से प्रार्थना करता है। उसे अवश्य सफलता मिलती है।
समाधि पर पूजा सर्वप्रथम मां ज्ञान ने पुष्प अर्पित कर की। यह पूजा समारोह दिन के बारह बजे तक चलता रहा। जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर पूजा अर्चना की। इस दौरान मां ज्ञान ने कहा कि मानव को अपने अहंकार का विसर्जन करना चाहिए। उन्होंने समस्त प्राणियों के प्रति सद्भावना और प्रेम पर बल दिया। कहा कि जिसकी जैसी भावना होती है, सोच और विचार होता है। उसी के अनुरूप जीवन का निर्माण कुदरत करती है। जितनी श्रद्धा अपने गुरुदेव के प्रति करता है, उसे उतना लाभ मिलता है। फुलों में सुगंध है, पर उस सुगंध की अनुभूति हवा का झोंका ही कराता है। इसी में सत्य का आनंद है। इसी तरह परमात्मा में अनंत शांति और अखंड आनंद है। उसका अनुभव गुरु से जुड़ने पर ही संभव है।
मंदिर में समाधि पूजन के लिए लगी भीड़।
कबीर ज्ञान मंदिर में पूजा के लिए कतार मंे खड़ीं महिलाएं।
नृत्य नाट्य का हुआ मंचन
मंदिरपरिसर में पूजा के दूसरे सत्र में कबीर ज्ञान मंदिर स्थित सत्संग भवन में दो बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बिहार, छत्तीसगढ, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा समेत अन्य राज्यों के श्रद्धालु उपस्थित हुए। जहां कई संत मनीषियों ने सत्संग और भजन पेश कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। छोटे छोटे कलाकारों ने भजन पर भाव नृत्य पेश किया। वहीं सतगुरु विवेक साहब की गुरुभक्ति पर उनके जीवन की घटना से संबंधित नाट्य मंचन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कबीर ज्ञान मंदिर न्यास के अरुण माथुर, किशोर सिन्हा, अनीता सिन्हा, मंजु बहन आदि का योगदान रहा।