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धान का उठाव नहीं कर रहा है प्रशासन

5 वर्ष पहले
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जिलाको-ऑपरेटिव बैंक के सभा कक्ष में गुरुवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में जिले के पैक्स के अध्यक्ष, सचिव ने भाग लिया। धान की अधिप्राप्ति किसानों से किए जाने को लेकर सहकारिता प्रशिक्षण केंन्द्र देवघर द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में धान अधिप्रप्ति की उपविधि, जमा वृद्धि योजना एवं कॉमन एकाउंटिंग लेखा को लेकर विस्तृत रुप से प्रशिक्षण दिया गया। इस शिविर में को-ऑपरेटिव बैंक सह सहकारिता विभाग के निदेशक मनोज कुमार, जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी राम चन्द्र पासवान, जिला सहकारिता पदाधिकारी नीलम कुमारी, सहायक निबंधक राजेश प्रसाद साह, प्रह्लाद भगत ने भाग लिया।

को-ऑपरेटिव बैंक के निदेशक मनोज कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा पैक्सों से धान का उठाव नहीं किए जाने से पैंक्सों में किसानों से धान अधि प्राप्ति किए जाने में कठिनाई हो रही है। सरकार की ओर से जिले में दो लाख टन धान किसानों से खरीदने का लक्ष्य निर्धारित है। दो लाख टन धान अधि प्राप्ति किए जाने में 28 करोड़ रुपए खर्च होंगे। राज्य सरकार द्वारा 4 करोड़ 25 लाख रुपए को ऑपरेटिव बैंक को धान अधि प्राप्ति के लिए दी गई है। जिले में 10 फरवरी तक 15 पैंक्सों से कुल 41 हजार 152 टन धान की खरीदारी की जा चुकी है।

शिविर को संबोधित करते अतिथि।

अबतक 4 करोड़ हो चुके हैं खर्च

धानखरीदने में 4 करोड़ 42 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। यदि सरकार की ओर से राशि शीघ्र निर्गत नहीं किया जाता है तो किसानों से धान अधि प्राप्ति करना बंद कर दी जाएगी। जिला प्रशासन जिले के 15 पैंक्सों से किसानों से धान अधिप्रप्ति करने का आदेश काे ऑपरेटिव बैंक को दी गई है। सभी पेंक्सों में धान का भंडारण अधिक जमा हो जाने से धान रखने की जगह नहीं रह गई है। जिससे पैक्स अध्यक्ष और सचिव को धान अधि प्राप्ति में कठिनाई हो रही है। जिला प्रशासन की ओर से लक्ष्मी राईस मील मोहनपुर से एकमात्र करार नामा किया गया है। लक्ष्मी राइस मील में अधिक धान रखने की व्यवस्था नहीं है। जिससे जिला प्रशासन द्वारा पैक्सों से धान का उठाव नहीं किया जा रहा है। सरकार द्वारा धान उठाव नहीं करने और राशि निर्गत नहीं किए जाने पर निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति किया जाना संभव नहीं है। फरवरी माह बीतने जा रहा है। मार्च क्लोजिंग रहा है। समय पर राशि निर्गत नहीं किया गया तो निर्धारित लक्ष्य एक चौथाई भी धान की अधि प्राप्ति नहीं हो पाएगी।

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