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अशोक विजयादशमी धूमधाम से मनाएंगे

7 वर्ष पहले
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बुद्धज्ञान विद्यालय सिहोडीह में बुद्धिजीवियों की एक बैठक अशोक विजयादशमी पर्व को मनाने को लेकर आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता निर्मल बौद्ध ने किया। अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि अशोक विजयादशमी का पर्व भारत के महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक के बौद्ध दीक्षा ग्रहण करने के उपलब्ध में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक बहुत ही न्यायप्रिय और लोकप्रिय शासक हुए है। उन्होंने भारत के विभिन्न भागों में स्तूपों का निर्माण कराया। उनके द्वारा स्थापित किए गए शिलालेख, प्रस्तर लेख आदि मानव के सामाजिक और पारिवारिक मर्यादाओं का बोधन कराता है। उनके शिलालेख भारतीय इतिहास के अमूल्य स्त्रोत है। महेंद्र रजक ने कहा कि 255 पूर्व में सम्राट अशोक ने तृतीय बौद्ध संगीत का आयोजन किया था और उसी संगति में त्रिपिटक की रचना हुई। त्रिपिटक के रूप में अभिधम्म पिटक, विनयपिटक, सुत्तपिटक का निर्माण हुआ। दामोदर गोप ने कहा कि सम्राट अशोक का साम्राज्य जितना विस्तृत या आज तक वैसा कोई सम्राट संसार मे नहीं हुआ। उन्होंने बुद्ध के विचारों को संसार के अन्य देशों मे प्रचारित किया। बैठक मे बौद्ध राजेश रवि, रूपलाल बौद्ध, अरविंद कुमार शर्मा, रीतलाल प्रसाद सहित कई लोग उपस्थित थे। बैठक मे अशोक विजयादशमी को धूमधाम से मनाने का संकल्प दोहराया गया।