पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • कला संस्कृति से कलाकारों को मिली है राष्ट्रीय पहचान

कला संस्कृति से कलाकारों को मिली है राष्ट्रीय पहचान

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
परम्परागतभारतीय कला संस्कृति को आगे ले जाने में देश के कुछ संस्थाओं के साथ गिरिडीह की संस्था कला संगम का भी नाम राष्ट्रीय स्तर पर लिया जाने लगा है। आज के दौर में जहां पूरा देश पाश्चात संगीत नृत्य की प्राथमिकता दिया जा रहा है। वहीं कला संगम जैसी संस्थाएं भारतीय शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य और नाटक के माध्यम से रंगकर्म को जिंदा रखने का कार्य कर रही है। कला संगम पाश्चात नृत्य संगीत का घोर विरोध करती है। पर अपने देश का गौरवशाली शास्त्रीय संगीत नृत्य की परम्परा को आगे ले जाना चाहती है। कला संगम यह कार्य पिछले 50 से अधिक वर्षों से भारतीय परम्परागत शास्त्रीय लोक नृत्य को जीवित रखने के लिए करती रही है। शहर के लोगों को सांस्कृितक गतिविधि में शामिल करने के उद्देश्य से कुछ बुद्धिजीवियों ने 1962 में सांस्कृतिक संस्था कला संगम का गठन किया। जिसमें सुधाकर प्रसाद, रवीन्द्र प्रसाद सिंह समेत कुछ लोगों ने यह पुनित कार्य किया। प्रारंभिक दौर में नाटक, कवि गोष्ठी, मुशायरा के अलावा शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम होते रहे।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी संगम के कलाकारों और पदाधिकारियों को देश भर के कई संस्थाओं ने पुरस्कृत किया है। असम में सचिव सतीश कुंदन को समेत शास्त्रीय नृत्य में सताक्षी को दूसरी संस्थाओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया है।

कला संगम की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में नृत्य करतीं कलाकार। फाइल फोटो।

लोगों का जुनून काम करता है संस्था को बढ़ाने में

कुछही वर्षों में कला संगम राष्ट्रीय स्तर पर नाटक, शास्त्रीय लोक नृत्य आयोजित करने वाली देश के गिने चुने संस्थाओं में शामिल हो गई। इस तरह का आयोजन करने वाली एक मात्र संस्था बनी। जहां बाहर से आने वाले कलाकारों को नि:शुल्क भोजन आवास की सुविधा मुहैया उपलब्ध कराता हो। पिछले कुछ वर्षों में हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिता के सफल संचालन में अध्यक्ष सचिव के अलावा राजेन्द्र बगेड़िया, प्रकाश सहाय, कंचन माला, दशरथ राम, अजय बगेड़िया, अंजनी कुमार सिन्हा, अरविंद कुमार, महेश अमन, मदन मंजरवे, विनय बक्सी, अजय कुमार सिन्हा, राजकुमार सिंह, डॉ परिमल समेत संस्था के कई लोगों का योगदान अपेक्षित रहा है। शहर के वासियों का योगदान भी कम नहीं रहा है।

देश स्तर के कलाकार

सराहते हंै आयाेजन को

पिछलेकुछ वर्षों से संस्था की ओर आयोजित राष्ट्रीय लघु नाटय, शास्त्रीय नृत्य लघु नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेने आए देश भर के कलाकारों ने कला संगम की इस आयोजन को सराहते है। देश के असम, मणीपुर, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उड़िसा समेत झारखंड के लोक कलाकार अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ यहां के आयोजन को मुक्तकंठ सराहते है। पश्चिम बंगाल के नाटय संस्था बंगलार सिंचन के कलाकार योगराज चौधरी, आगरा की अलका सिंह समेत पूर्व के कार्यक्रम में आए असम, मणीपुर के राजेश, राजस्थान के पुस्कर, गुजरात के राहुल दवे समेत देश भर के कलाकार यहां बार-बार आना चाहते है।