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स्कूल भवन अधूरा, घर में हो रही है पढ़ाई

7 वर्ष पहले
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झारखंडसरकार के सीएम हेमंत सोरेन का पैतृक गांव के एक स्कूल की स्थिति बहुत दयनीय है। यहां बच्चों की ना तो नियमित क्लास लगती है, ना पढ़ाई होती है, ना ही भोजन मिलता है। उसके बाद भी विभाग के अधिकारियों ने कभी इसकी सुध नहीं ली। ऐसी कुव्यवस्था गोला प्रखंड के सुदूरवर्ती उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय रौ रौ की है। यहां पिछले आठ वर्षों से स्कूल भवन के अभाव में शिक्षक के घर में क्लास चल रहा है। जिस कारण कुर्सी-टेबल होने के बाद भी बच्चों को जैसे-तैसे बैठाया जाता है। यहां सरकारी नियम के तहत नहीं बल्कि शिक्षक की मर्जी से पढ़ाई होती है और स्कूल खुलने और बंद होने का समय भी शिक्षक अपनी मर्जी से तय करते हैं। बच्चों की माने तो नियमित रूप से भोजन भी इन्हें नहीं दिया जाता है। ऐसी स्थिति स्कूल भवन नहीं होने के कारण उत्पन्न होना बताया जाता है। जिसका खामियाजा बेकसूर छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

पुरानाइस्टीमेट बन रहा है बाधक

शिक्षककैलाश चंद्र महतो ने बताया कि स्कूल भवन का काम आठ वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है, जिसे अब पूरा करने में अधिक खर्च आएगा। उन्होंने अतिरिक्त इस्टीमेट बनाने के बाद ही काम को पूरा करने की बात कही। जानकारी के अनुसार वर्ष 2006-07 में झारखंड शिक्षा परियोजना के तहत भवन निर्माण की स्वीकृति मिली हुई थी और उस समय पूरी राशि संबंधित ग्राम शिक्षा समिति के खाते में भेज दी गई थी, लेकिन समिति में आपसी विवाद के कारण भवन का काम पूरा नहीं हो पाया।

गोला बीईईओ निर्मला प्रजापति ने कहा कि शिक्षक की लापरवाही के कारण स्कूल भवन का काम अधूरा पड़ा हुआ है। इसलिए जैसे भी हो शिक्षक को भवन का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। भवन का काम पूरा नहीं होने की स्थिति में निश्चित रूप से संबंधित शिक्षक पर कार्रवाई होगी।

अधूरा पड़ा हुआ स्कूल भवन।

इस घर में चलता है स्कूल।