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वनकर्मियों को झेलना पड़ा लोगों का विरोध

7 वर्ष पहले
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घटनास्थल पर ग्रामीणों की उमड़ी भीड़, की गई पूजा-अर्चना

भास्करन्यूज | गोला

थानाक्षेत्र के साड़म पंचायत के सेरेंगातु गांव के पत्थलगढ़ा के जमुनियाटांड़ में सोमवार की रात दो हाथियों की रहस्यमय मौत हो गई। के मामले में घटनास्थल पर पहुंचे डीएफओ एके सिंह, रेंजर रामलखन पासवान और फोरेस्टर मिंज हेंब्रम को ग्रामीणों का विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने इस घटना के लिए वन विभाग को दोषी ठहराया। कहा कि एक तरफ हाथियों के रौंदने से फसलें बर्बाद हो रही हैं, तो दूसरी तरफ हाथियों की मौत भी हो रही है। इसके बाद भी विभाग हाथियों को संरक्षित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रही है।

पोस्टमार्टमके बाद दोनों को दफनाया गया : मृतपाए गए दोनों हाथियों का पोस्टमार्टम डीएफओ के उपस्थित में कराया गया। इसके बाद उसी स्थान पर दोनों को दफना दिया गया। इस दौरान डीएफओ ने बताया कि प्रथम दृष्टया में लगता है कि करंट के चपेट में आने से हाथियों की मौत हुई है, लेकिन सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने सकेगी।

सरकार की ओर से हाथी को संरक्षित प्राणी की श्रेणी में रखा गया है, गोला प्रखंड में अबतक आठ हाथियों की मौत हो चुकी है। जिसमें पहला हाथी के बच्चे की मौत 29 नवंबर 2002 को पूरबडीह जंगल में हुई थी, 13 सितंबर 2003 को पूरबडीह जंगल में ही विद्युत करंट की चपेट में आने से एक साथ दो हाथियों की मौत हो गई थी, 26 जनवरी 2008 को नावाडीह गांव में एक हाथी की मौत (संदेहास्पद), अगस्त 2009 में बड़की हेसल में एक हाथी की मौत (संदेहास्पद), सितंबर 2013 को बेटुलकला में एक हाथी की मौत (संदेहास्पद) और अब एक साथ सेरेगांतू में दो हाथियों की मौत (संदेहास्पद)। पूरबडीह जंगल में हुई तीन हाथियों की मौत को छोड़ दिया जाय तो शेष पांच हाथियों की मौत को वन विभाग संदेहास्पद ही बताया है जिसका खुलासा आज तक नहीं हुआ है।

खेत में मृत पड़ी हथिनी।