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यह पहलामौका नहीं ह

7 वर्ष पहले
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यह पहलामौका नहीं है, जब ख्यात वैज्ञानिक वॉटसन नोबल पुरस्कार को बेचकर विवादों में घिरे हैं, बल्कि उनका पूरा जीवन ही इस तरह के विवादों में रहा है। माता-पिता की अकेली संतान जेम्स मूल रूप से स्कॉटलैंड से अमेरिका में आकर बसे। उनको इस बात की खुशी थी कि उनके पिता भगवान को नहीं मानते थे। वे कैथोलिक थे, लेकिन खुद को ‘एन एस्केपी फ्रॉम कैथोलिक रिलीजन’ के रूप में पेश करते रहे। विद्वता तो बचपन से ही रही। 12 साल की उम्र में ही वे ख्यात रेडियो शो (क्विज किड्स) में आए। धड़ल्ले से सवालों के जवाब दिए। यह देखकर 15
यह पहलामौका नहीं है, जब ख्यात वैज्ञानिक वॉटसन नोबल पुरस्कार को बेचकर विवादों में घिरे हैं, बल्कि उनका पूरा जीवन ही इस तरह के विवादों में रहा है। माता-पिता की अकेली संतान जेम्स मूल रूप से स्कॉटलैंड से अमेरिका में आकर बसे। उनको इस बात की खुशी थी कि उनके पिता भगवान को नहीं मानते थे। वे कैथोलिक थे, लेकिन खुद को ‘एन एस्केपी फ्रॉम कैथोलिक रिलीजन’ के रूप में पेश करते रहे। विद्वता तो बचपन से ही रही। 12 साल की उम्र में ही वे ख्यात रेडियो शो (क्विज किड्स) में आए। धड़ल्ले से सवालों के जवाब दिए। यह देखकर 15 साल की उम्र में ही उनको स्कॉलरशिप मिली और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में दाखिला मिला। पिता के साथ बर्ड वॉचिंग करने के शौकीन वॉटसन ने जब 18 साल की उम्र में ‘वॉट इज़ लाइफ’ नाम की पुस्तक पढ़ी तो जीवन के प्रति नजरिया ही बदल गया। वे ऑरनिथोलॉजी छोड़कर जेनेटिक्स का अध्ययन करने लगे। अपने साथियों के बीच भी वे विवादों में रहे। उनके साथी और हार्वर्ड के प्रसिद्ध बायोलॉजिस्ट एडवर्ड विल्सन का कहना है कि उन्होंने ऐसा विचित्र व्यक्ति कभी नहीं देखा।

पीएचडी के बाद जब वे हार्वर्ड में नौकरी करने गए, तब भी लोगों की राय उनके प्रति ठीक नहीं रही। उनके बयानों से भी यह बात झलकती है। वे कई राजनीतिक गतिविधियों में भी शामिल रहे। विएतनाम युद्ध के विरोध की उन्होंने अगुवाई की। 1968 ने उन्हें वह सब दिलाया, जिसके बारे में कभी सोचा भी नहीं था। डबल हेलिक्स नाम की उनकी पुस्तक ने डीएनए स्ट्रक्चर के बारे में खुलासा किया। अपने से आधी उम्र की एलिजाबेथ से उन्होंने शादी की, जो उस समय पास के रेडक्लिफ कॉलेज में पढ़ती थी। अपने विवाह के बारे में उन्होंने ये कहा-

\\\"मैं अच्छे जीन वाली लड़की ढूंढ़ रहा था और उस समय एलिजाबेथ मुझे बेहद सुंदर दिखी।’ अपने बयानों के कारण ही उनको कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैब से निलंबित किया गया था। हफ्तेभर बात उनको लैब से सेवानिवृत्त कर दिया गया। ये बयान नस्ल और बौद्धिकता से संबंधित थे। इसी प्रकार से 1990 में जब उन्हें मानव जीनोम प्रोजेक्ट का हेड बनाया गया तो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के निदेशक से विवाद हो गया। 1992 में वे इस प्रोजेक्ट से अलग हो गए, लेकिन 1994 में अपनी विद्वत्ता के कारण वे इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर बनाए गए।